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जुर्रत हो गयी है

Ye Jurrat ho gayi hai

Mohabbat ho gayi hai

Use bahi ne maaraa

siyasat ho gayi hai

Zalimon bach ke rehna

Baghawat ho gayi hai

Yahan matam na ho gar

Shahadat ho gayi hai

Buzargon ka karoon kya

Wasiyat ho gayi hai

Fata bam aur kya ho

Mazzamat ho gayi hai

ये जुर्रत हो गयी है

मोहब्बत हो गयी है


उसे भाई  ने मारा
सियासत हो गयी है

ज़ालिमों बच के रहना
बग़ावत हो गयी है

यहाँ मातम ना हो गर
शहादत हो गयी है

बूज़र्गों का करूँ क्या
वसीयत हो गयी है

फटा बम और क्या हो
मज़्ज़ामत हो गयी है

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Comment

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 27, 2011 at 1:22pm
भी विशाल बाग़ जी, छोटी बहर में बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है अपने, बधाई कबूल करें !

कृपया ध्यान दे...

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