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Yogyata Mishra's Blog (15)

दिल की आवारगी

अब तो आहट सी रहती है आवाज़ की,

किसी की आवाज़ आये,
तो ज़माना गुज़र गया...
हम तो सपनों को ही,…
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Added by Yogyata Mishra on March 23, 2012 at 11:49am — 5 Comments

रिश्ते

जो हमारे साथ होते हैं,

हम उनके होकर भी,
उनके साथ नहीं होते...
जरा किस्मत तो देखिये....
हम जिनके होते है,
वो हमारे साथ होकर भी,
हमारे साथ नहीं होते....
रिश्तो की समझ तो,
हमारी अपनी सोच, 
से परे है...
यह बिलकुल सिक्को की,
खनक से होते है...
आवाज़ तो  नजदीकियों  की 
होती है,
एहसास में नजदीकियां नहीं 
होती…
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Added by Yogyata Mishra on March 9, 2012 at 11:16am — 6 Comments

अनछुआ एहसास

बहुत सोचा कि लिख ही डालूँ 

यादों और एहसासों को साँस दे ही डालूँ...
आई जब तन्हाई की आगोश में,
लायी जब यादों को होश में...
तब जेहन में आया किसी का जिक्र,
एहसासों का वो गुबार, 
जिसकी नहीं थी कोई फिक्र....
यादों के झरोके में पाया वो एहसास,
जिससे न थी कभी टकराने की कोई आस....
उन एहसासों को दी अल्फाजो…
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Added by Yogyata Mishra on February 5, 2012 at 4:00pm — 3 Comments

आबाद

हर कोना शख्सियत को  

बर्बाद करने को आतुर है,
सोचा हर कोने से ही
प्रेम कर लिया जाए...
बर्बाद होना ही अगर 
आबाद होने की निशानी है,
तो क्यों ना आज 
बर्बाद ही हो लिया जाए...
 
-योग्यता

Added by Yogyata Mishra on January 14, 2012 at 10:30am — 4 Comments

बचपन की यादें

वो बचपन की यादें,

वो सपनो सी यादें,
वो पतंगे उड़ाना,
वो नाव चलाना,
वो बारिश की बूँदें,
वो मिटटी की छीटें,
सपनो से प्यारी है,
अब भी वो यादें,
वो बचपन की यादें,
वो बचपन की यादें.....
वो माँ की लोरी,
वो पापा की डांट,
वो खेल में…
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Added by Yogyata Mishra on January 13, 2012 at 3:00pm — 4 Comments

वफा

वफाओं के किस्सों की, 
तो कोई किताब ही नहीं...
यह तो वो ज़ज्बात हैं,
जिनके लिए कोई अल्फाज़ ही नहीं...
कैसे बाँधा है किसी ने,
वफाओं को अल्फाजों में,
ये तो वो किस्से है,
जिनकी कोई जुबाँ ही नहीं...

Added by Yogyata Mishra on January 11, 2012 at 11:01am — 1 Comment

आस

ख़ुशी पहले भी बहुत थी,

क़सक थी हर साँस में,
प्रतीक्षा इस  नज़र में थी,
धड़कने थी हर रात में,
कोई आकर के गया,
टीस थी हर याद में,
जाकर आएगा कोई,
जिंदगी बीती इस आस में...
ख़ुशी पहले भी बहुत थी,
आज भी है हर याद में,
कोई जाकर आएगा,
आस थी हर साँस में,
आस है हर याद में....

Added by Yogyata Mishra on December 29, 2011 at 12:04pm — No Comments

अकेला

वो तो बड़ा अकेला था,

उसको सबने लूटा था,
खुशियों की छाव में भी,
उसने गम ही समेटा था,
वो तो बड़ा अकेला था....
हँसी और किलकारी थी
चहु ओर फुलवारी थी,
सभी ओर तो सावन था,
उसने तो मरू ही देखा था,
वो तो बड़ा अकेला था...
हाथों में तो रोटी थी,
जो उसके जैसी रोती थी,
गम की ठंडी हवा में भी,
सुख को उसने जीर्ण चादर लपेटा…
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Added by Yogyata Mishra on December 22, 2011 at 12:45pm — 5 Comments

अँधेरा

क्या समझू उसे

जो समझ न आता है

सिर्फ छाता चला जाता है...

दिन का जाना समझू 

या दिन का आना 

स्थिरता है या अस्थिरता

है एक अनसुलझी पहेली

जिसे कोई समझ न पाता है....

ये तो वो है जो

सिर्फ छाता चला जाता है..

कही तो लेकर आता है 

खुशियों की सुबह

और गम का सन्नाटा 

कही छा जाता…

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Added by Yogyata Mishra on December 21, 2011 at 11:17am — 2 Comments

वक़्त

ज़िन्दगी हमे मोहताज़ नहीं बनाती है,

वो तो बस आईना दिखाती है,

मोहताज़ तो इंसान होता है,

हम ज़िन्दगी का नाम लगा देते है......

वक़्त कुछ ना है,

बस हमारी आत्मा की कमजोरी है....

आत्मा कही कमज़ोर होती है,

हम कहते है वक़्त निकल गया...

ये सिर्फ कहना है हमारा,

ऐसी सोच पर तरस आता है....

हम हाथ पैर वाले होकर

ये स्वीकारते हैं कि,

एक बिना साँस वाला वक़्त

हमे मोहताज़ बनाता ह...

Added by Yogyata Mishra on December 20, 2011 at 1:02pm — 1 Comment

अजब दशहरा

गजब दशहरा आया रे

अजब दशहरा आया रे 
नयी नयी खुशिया लाया रे 
देख दशहरा आया रे ......
चहु ओर है धूम मची 
शोर मचे है गली गली 
बच्चो के संग बूढों का
अजब मेल यह लाया रे
देख दशहरा आया रे...
सब झूमे है मस्ती में 
खुशियों की इन बस्ती में 
सब रंगे है एक रंग में
प्रेम का रंग ये लाया रे 
देख दशहरा आया रे
अजब दशहरा आया रे 
ढेरो खुशिया लाया…
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Added by Yogyata Mishra on October 6, 2011 at 9:02pm — No Comments

साहस

आँगन का एक छोटा सा

पौधा

जो बढ़ना चाहता है

छटपटाता है बढ़ने को

पर

बड़े पेड़ का बडप्पन

रोकता है उसे

टोकता है उसे

न बढ़ने देने का डर

देता है उसे

हौसला व चाहत फिर भी

जीवित है उसमे

आगे बढ़ने का साहस

निहित है उसमे

कुछ करने ललक है उसमे

एक उम्मीद

उस छोटे से पौधे की

कि

एक दिन वह छोटा सा पौधा

भी

उस बड़े से पेड़ से कही

आगे होगा

वो छोटा सा पौधा

तो बढा जा रहा है

खड़ा हो रहा है…

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Added by Yogyata Mishra on August 18, 2011 at 9:12pm — 6 Comments

क्या है वो.....

हर प्रश्न का हल भी वो है

और

जटिल प्रश्नों से भरी उलझन भी वो है........

क्या है वो.....

जीवन की परिभाषा वो

मृत्यु की परछाई वो

जीवन तो पहले भी था

अब जीवन की सार्थकता भी वो है.......

क्या है वो......

बिंदिया की चमक वो

कंगन की खनक वो

शृंगार तो सजाता पहले भी था

अब शृंगार की चमक भी वो है

क्या है वो.....

दिल की धड़कन भी वो

चेहरे की ख़ुशी भी वो

ख़ुशी पहले भी थी

पर ख़ुशी की खनक भी वो

क्या है वो......

एक…

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Added by Yogyata Mishra on July 27, 2011 at 5:00pm — 6 Comments

ममतामयी माँ



माँ
शब्दों में न बांधी 
जा सकने वाली परिभाषा,
कोटिश: दुखों में छिपी 
सुखों की एक अभिलाषा....
तुम्हारा आँचल 
अनंत गगन को भी, 
छोटा कर देता
तुम्हारा प्यार 
समुद्र से विशाल दुखों 
को भी कम कर देता....
कहा से समाया है ,
तुममे इतना…
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Added by Yogyata Mishra on July 4, 2011 at 11:14am — 2 Comments

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