For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Yogyata Mishra's Blog (15)

दिल की आवारगी

अब तो आहट सी रहती है आवाज़ की,

किसी की आवाज़ आये,
तो ज़माना गुज़र गया...
हम तो सपनों को ही,…
Continue

Added by Yogyata Mishra on March 23, 2012 at 11:49am — 5 Comments

रिश्ते

जो हमारे साथ होते हैं,

हम उनके होकर भी,
उनके साथ नहीं होते...
जरा किस्मत तो देखिये....
हम जिनके होते है,
वो हमारे साथ होकर भी,
हमारे साथ नहीं होते....
रिश्तो की समझ तो,
हमारी अपनी सोच, 
से परे है...
यह बिलकुल सिक्को की,
खनक से होते है...
आवाज़ तो  नजदीकियों  की 
होती है,
एहसास में नजदीकियां नहीं 
होती…
Continue

Added by Yogyata Mishra on March 9, 2012 at 11:16am — 6 Comments

अनछुआ एहसास

बहुत सोचा कि लिख ही डालूँ 

यादों और एहसासों को साँस दे ही डालूँ...
आई जब तन्हाई की आगोश में,
लायी जब यादों को होश में...
तब जेहन में आया किसी का जिक्र,
एहसासों का वो गुबार, 
जिसकी नहीं थी कोई फिक्र....
यादों के झरोके में पाया वो एहसास,
जिससे न थी कभी टकराने की कोई आस....
उन एहसासों को दी अल्फाजो…
Continue

Added by Yogyata Mishra on February 5, 2012 at 4:00pm — 3 Comments

आबाद

हर कोना शख्सियत को  

बर्बाद करने को आतुर है,
सोचा हर कोने से ही
प्रेम कर लिया जाए...
बर्बाद होना ही अगर 
आबाद होने की निशानी है,
तो क्यों ना आज 
बर्बाद ही हो लिया जाए...
 
-योग्यता

Added by Yogyata Mishra on January 14, 2012 at 10:30am — 4 Comments

बचपन की यादें

वो बचपन की यादें,

वो सपनो सी यादें,
वो पतंगे उड़ाना,
वो नाव चलाना,
वो बारिश की बूँदें,
वो मिटटी की छीटें,
सपनो से प्यारी है,
अब भी वो यादें,
वो बचपन की यादें,
वो बचपन की यादें.....
वो माँ की लोरी,
वो पापा की डांट,
वो खेल में…
Continue

Added by Yogyata Mishra on January 13, 2012 at 3:00pm — 4 Comments

वफा

वफाओं के किस्सों की, 
तो कोई किताब ही नहीं...
यह तो वो ज़ज्बात हैं,
जिनके लिए कोई अल्फाज़ ही नहीं...
कैसे बाँधा है किसी ने,
वफाओं को अल्फाजों में,
ये तो वो किस्से है,
जिनकी कोई जुबाँ ही नहीं...

Added by Yogyata Mishra on January 11, 2012 at 11:01am — 1 Comment

आस

ख़ुशी पहले भी बहुत थी,

क़सक थी हर साँस में,
प्रतीक्षा इस  नज़र में थी,
धड़कने थी हर रात में,
कोई आकर के गया,
टीस थी हर याद में,
जाकर आएगा कोई,
जिंदगी बीती इस आस में...
ख़ुशी पहले भी बहुत थी,
आज भी है हर याद में,
कोई जाकर आएगा,
आस थी हर साँस में,
आस है हर याद में....

Added by Yogyata Mishra on December 29, 2011 at 12:04pm — No Comments

अकेला

वो तो बड़ा अकेला था,

उसको सबने लूटा था,
खुशियों की छाव में भी,
उसने गम ही समेटा था,
वो तो बड़ा अकेला था....
हँसी और किलकारी थी
चहु ओर फुलवारी थी,
सभी ओर तो सावन था,
उसने तो मरू ही देखा था,
वो तो बड़ा अकेला था...
हाथों में तो रोटी थी,
जो उसके जैसी रोती थी,
गम की ठंडी हवा में भी,
सुख को उसने जीर्ण चादर लपेटा…
Continue

Added by Yogyata Mishra on December 22, 2011 at 12:45pm — 5 Comments

अँधेरा

क्या समझू उसे

जो समझ न आता है

सिर्फ छाता चला जाता है...

दिन का जाना समझू 

या दिन का आना 

स्थिरता है या अस्थिरता

है एक अनसुलझी पहेली

जिसे कोई समझ न पाता है....

ये तो वो है जो

सिर्फ छाता चला जाता है..

कही तो लेकर आता है 

खुशियों की सुबह

और गम का सन्नाटा 

कही छा जाता…

Continue

Added by Yogyata Mishra on December 21, 2011 at 11:17am — 2 Comments

वक़्त

ज़िन्दगी हमे मोहताज़ नहीं बनाती है,

वो तो बस आईना दिखाती है,

मोहताज़ तो इंसान होता है,

हम ज़िन्दगी का नाम लगा देते है......

वक़्त कुछ ना है,

बस हमारी आत्मा की कमजोरी है....

आत्मा कही कमज़ोर होती है,

हम कहते है वक़्त निकल गया...

ये सिर्फ कहना है हमारा,

ऐसी सोच पर तरस आता है....

हम हाथ पैर वाले होकर

ये स्वीकारते हैं कि,

एक बिना साँस वाला वक़्त

हमे मोहताज़ बनाता ह...

Added by Yogyata Mishra on December 20, 2011 at 1:02pm — 1 Comment

अजब दशहरा

गजब दशहरा आया रे

अजब दशहरा आया रे 
नयी नयी खुशिया लाया रे 
देख दशहरा आया रे ......
चहु ओर है धूम मची 
शोर मचे है गली गली 
बच्चो के संग बूढों का
अजब मेल यह लाया रे
देख दशहरा आया रे...
सब झूमे है मस्ती में 
खुशियों की इन बस्ती में 
सब रंगे है एक रंग में
प्रेम का रंग ये लाया रे 
देख दशहरा आया रे
अजब दशहरा आया रे 
ढेरो खुशिया लाया…
Continue

Added by Yogyata Mishra on October 6, 2011 at 9:02pm — No Comments

साहस

आँगन का एक छोटा सा

पौधा

जो बढ़ना चाहता है

छटपटाता है बढ़ने को

पर

बड़े पेड़ का बडप्पन

रोकता है उसे

टोकता है उसे

न बढ़ने देने का डर

देता है उसे

हौसला व चाहत फिर भी

जीवित है उसमे

आगे बढ़ने का साहस

निहित है उसमे

कुछ करने ललक है उसमे

एक उम्मीद

उस छोटे से पौधे की

कि

एक दिन वह छोटा सा पौधा

भी

उस बड़े से पेड़ से कही

आगे होगा

वो छोटा सा पौधा

तो बढा जा रहा है

खड़ा हो रहा है…

Continue

Added by Yogyata Mishra on August 18, 2011 at 9:12pm — 6 Comments

क्या है वो.....

हर प्रश्न का हल भी वो है

और

जटिल प्रश्नों से भरी उलझन भी वो है........

क्या है वो.....

जीवन की परिभाषा वो

मृत्यु की परछाई वो

जीवन तो पहले भी था

अब जीवन की सार्थकता भी वो है.......

क्या है वो......

बिंदिया की चमक वो

कंगन की खनक वो

शृंगार तो सजाता पहले भी था

अब शृंगार की चमक भी वो है

क्या है वो.....

दिल की धड़कन भी वो

चेहरे की ख़ुशी भी वो

ख़ुशी पहले भी थी

पर ख़ुशी की खनक भी वो

क्या है वो......

एक…

Continue

Added by Yogyata Mishra on July 27, 2011 at 5:00pm — 6 Comments

ममतामयी माँ



माँ
शब्दों में न बांधी 
जा सकने वाली परिभाषा,
कोटिश: दुखों में छिपी 
सुखों की एक अभिलाषा....
तुम्हारा आँचल 
अनंत गगन को भी, 
छोटा कर देता
तुम्हारा प्यार 
समुद्र से विशाल दुखों 
को भी कम कर देता....
कहा से समाया है ,
तुममे इतना…
Continue

Added by Yogyata Mishra on July 4, 2011 at 11:14am — 2 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
18 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service