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Rana Navin's Blog (3)

अंतर



अक्सर सोचता हूँ…
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Added by Rana Navin on February 19, 2012 at 1:32am — 1 Comment

भींगी हुयी शाम

यह भींगी हुयी शाम ,
और तेरे शहर का भटकता बादल
किस सोच में खो गयी दिल की दुनिया ,
आने लगी याद तेरी ,
और ना जाने
क्या - क्या याद आने लगा
बीता हुआ ,
इस भटकते बादल ने
भींगें मौसम में
दर्द की आग फैलाने लगा //राणा //

Added by Rana Navin on November 19, 2010 at 11:40am — 1 Comment

जब ना तुम होगी, ना तेरा आसरा होगा

जब ना तुम होगी, ना तेरा आसरा होगा
अल्लाह ! आने वाले दिन में न जाने क्या-क्या होगा !

सब भूल जाते है साथ में गुजारें लम्हें एक दिन,
वक़्त बदलेगा तो सब कुछ कितना बदल चुका होगा !

सफ़र में नए मोड़ पर कोई मिल जाएगा ही " राणा"
दिल जो मोम का हैं, लोहे में तबतक ढल चुका होगा !!

Added by Rana Navin on November 16, 2010 at 3:06pm — 5 Comments

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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
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