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Ajay Singh's Blog (15)

ऐ गम ! जा के ढूंढ़ ले कोई दूसरा घर

ऐ गम ! जा  के  ढूंढ़ ले  कोई  दूसरा घर  , 

दिल में आज से मेरे , बसेरा उनका होगा ..
              इस घर का मालिक अब तू नही है ,वो हैं 
              खाली अभी तुझे  , घर ये करना होगा ..
दीवानगी ने उनकी पागल किया है हमको 
पागलपन का कर्ज तुझको ही भरना होगा ...
             घर ही तेरा अब ,  बेघर तुझे कर रहा है 
             खातिर इस घर की बेघर तुझे रहना होगा…
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Added by Ajay Singh on June 24, 2012 at 10:01am — 7 Comments

गर वो हमारे होते

जिन्दगी हमारी भी बनती एक सवाल

गर सवाल का जबाब 'वो 'हमारे होते

उन यादों में ही गुजर लेते उमर सारी

गर दो पल भी 'वो ' साथ हमारे होते ..



न भिगोते अश्क पलकों को भी ,गर

ये नयन न उनके मतवारे होते

जान लेते हकीकत प्यार की हम भी

जो प्यार का आइना 'वो ' हमारे होते ..



राहों में हमारे होते उजाले अनेक

जो 'उनके अँधेरे ' न हमारे होते

भूल के उनको सो लेते चैन से

सपने जो वश में हमारे होते ..



गुनगुना लेते ताउम्र उनको हम

जो…

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Added by Ajay Singh on June 17, 2012 at 9:30am — 2 Comments

- - - -जब मुझे प्यार हो जायेगा - - - - -

आँखें भर आयेंगी, ये दिल भी रो जायेगा 

बदनामों में नाम हमारा भी हो जायेगा 
नींद भी जाएगी ,चैन भी खो जायेगा 
मुझे जब  किसी से  प्यार हो जायेगा 
             चाँद में कभी दाग मुझको नज़र आयेगा 
             पर ' वो ' हमेशा ही  बेदाग नजर आयेगा
             कभी रोशनी से उसकी चमकेगा जहां मेरा 
              रोशनी से उसकी कभी चाँद  भी लाज़ायेगा
चेहरा उसका खिलता गुलाब…
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Added by Ajay Singh on June 7, 2012 at 12:09pm — 6 Comments

ये सिर्फ अपनों के लिये ही बहते हैं

कदम उनसे दूर जाने लगे 

मन में उथल -पुथल 
सी होने लगी 
वो साथ थे तब तक 
सब अच्छा था
अब ये आँखें भी 
बोलने लगीं 
इनकी नमी ह्रदय -व्यथा 
व्यक्त करने लगी 
और शायद आंसुओं की
उपस्तिथि बयां कर 
रही थी .
और हाँ कल जब वो आये 
तब भी ये नमीं थी ,
आंसूं बहे थे 
पर कल तो दिल में ख़ुशी 
का ठिकाना न था .
मैं भला…
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Added by Ajay Singh on June 1, 2012 at 9:36am — 7 Comments

दिल का मेरे घर जलने वाले...

फरियाद करती हूँ तुझे गमे ए दिल न मिले 

जख्म ए जिगर मुझको दिलाने वाले...
कल तुझको भी कहीं रोना न पड़ जाये 
ऐ  मुझ पे  आज  मुस्कराने  वाले... 
दिल का तेरे चैन  बर्बाद हो न  जाये 
रातों की  नीद  मेरी  उड़ने  वाले... 
जग में अपना नाम तो बचाए रखना 
जग को  मुझ पे यूँ  हंसाने  वाले...
फिर कभी किसी से इश्क न करना 
इश्क का आइना मुझको…
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Added by Ajay Singh on May 28, 2012 at 6:40pm — 3 Comments

- - - - माँ - - - -

कैसे तुझे  बताऊँ माँ कि

याद तेरी यहाँ आती  है

तेरे प्यार की वो दुनियां अब

आँख मेरी भर जाती  है |



भूखी तू रह जाती है पर

खाना मुझे  खिलाती  है

राह का मेरी मिटाने अँधेरा

तू दीपक बन  जाती  है |



घिर जायें हज़ार दुखों से

जब,राह नजर न आती है

गोद तेरी तो उस पल भी माँ

स्वर्ग  धरा  बन  जाती  है |



दया  भाव …

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Added by Ajay Singh on October 23, 2011 at 12:53pm — 1 Comment

---- सवाल खुदा से -----

ऐ खुदा   इस  जहाँ   में   तेरे ,

            कोई  हँसता ,कोई   रोता   क्यों ,,



इन्सान -इन्सान  सब  एक  समान  हैं  तो  फिर

            उंच -नीच   जाति-भेद  क्यों



इन्सान  तो  सब  तेरी  ही  सन्तान  हैं  फिर ,

            कोई  वारिस  कोई  लावारिस  क्यों ,,



तुने  ये  पेट  तो  सबको  दिया  हैं  फिर ,

            किसी  को  खाना  कोई  भूखा  क्यों ,,



दुनिया  में  कुछ  तेरा -मेरा  नही  फिर

            कोई  धनी कोई  गरीब  क्यों…

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Added by Ajay Singh on June 19, 2011 at 11:44am — No Comments

--------एक असफलता के बाद ------

एक छोटी सी असफलता मिली तो क्या

हर बार सफलता भी जरूरी नही होती ,

सूरज कि ऊंचाई पर न पहुँच सके तो क्या

चाँद कि ऊंचाई भी तो कम नही होती ,

एक हसरत पूरी न हो पायी तो क्या हुआ

हसरतें लोगों  की क्या अधूरी नही होती ,

हंसती-हंसती आती है नजर दुनिया तो क्या

हर हंसी के पीछे भी तो ख़ुशी जरूरी नही होती,

हमारा एक पल अच्छा न गुजरा तो क्या हुआ

 हर पल तो जिन्दगी ख़ूबसूरत नही होती ,

बोलकर मुंह से हाल न बता सके तो क्या

कविता क्या बीते पलों की जुबानी नही… Continue

Added by Ajay Singh on June 19, 2011 at 11:40am — No Comments

सब अपने भी बेगाने हो गये

इस दुनिया में अब रहा न कोई अपना

अब तो सब अपने भी बेगाने हो गये ,                    

लगने लगा अब हमें कुछ ऐसा,

महफिल में भी अनजाने हो गये  |

 

आखों में ख्वाब जो दिखाया करते थे वो

 ही अब हमारे ख्यालों के नज़ारे हो गये ,

जो खाते थे  कसम  दोस्ती निभाने  की

करें क्या जब वो ही दुश्मन हमारे हो गये



विश्वास जताने वालों ही तोडा है विश्वास

तमन्नाओं के तार-तार अब हमारे हो गये

बीच मंझधार में लाके छोड़ दिया है हमको

किश्ती जो बनने चले थे… Continue

Added by Ajay Singh on January 22, 2011 at 8:30pm — 1 Comment

कविता --- ताकत कलम की



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Added by Ajay Singh on January 8, 2011 at 4:29pm — No Comments

कविता ------तेरे साथ हैं हम



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Added by Ajay Singh on January 8, 2011 at 9:46am — No Comments

कविता --" टूटा दिल"

कैसे तुम्हें बताऊँ मैं जो टूटा मेरा दिल है
खाते तरस यदि जानते क्या मेरी मुश्किल है
मैंने सोचा मैं हूँ किश्ती तू मेरा साहिल है
पर न थी खबर मुझे कि तू ही मेरा कातिल है
तुझसे दिल लगा के मुझको क्या हुआ हासिल है
दिल पर जुल्म ढहाने वालों में तू ही शामिल है
जान न पाया था तुझको मैं तू न मेरे काबिल है
मेरी जिन्दगी में अब चरों तरफ गमों की ही महफ़िल है
अब होश मुझे जब आया खुद का तो आंख मेरी बोझिल है
देर से सही अब सोच रहा हूँ कि कहाँ मेरी मंजिल है

Added by Ajay Singh on November 20, 2010 at 11:47am — 2 Comments

भ्रमर -फूल संवाद

गुँजन करता एक भँवरा,जब फूल के पास आया

देख कली की सुन्दरता को मन ही मन मुस्काया ,,

खिली कली को देखकर ,मन ही मन शरमाया

रहा नहीं काबू जब मन पर ,तो एसा फ़रमाया ,,

अरे कली तू बहुत ही सुन्दर ,क्या करूँ तेरा गुणगान

तेरे लिए तो लोग मरते हैं , तू है बड़ी महान, ,

देख तरी सुन्दरता को मन पे रहा न काबू है

दुनिया का मन मोह ले तू ,तुझमे तो वो जादू है ,,

तेरी एक झलक पाने को मैं जीता और मरता हूँ

तेरे न मिलने पे तो मैं, दिन रात आहें भरता हूँ

महक से तेरी महके… Continue

Added by Ajay Singh on November 3, 2010 at 12:00am — 1 Comment

जब रूठ गये अपने

एक बार सब अपने रूठ गये मुझसे

पर क्यों थे रूठे यह पता नही

क़दमों में ला के रख दीं सब नैंमतें उनके

पर उनके दिलों में नफरत वही रही

कोशिश की उनके दिलों में वसने की

मगर उनकी सोच तो वही रही

कशिश की लाख मानाने क़ी मैंने उनको

पर उन पर इसका कोई असर नही

उनके लिए मांगी थीं लाखों दुआएं

पर उनको शायद यह खबर ही नही

दिल खोलकर भी रख देता सामने उनके

पर शायद वो पत्थर दिल पिघलते नही

न जाने वो सब क्यों शक करते हैं मुझपे

अब तक मुझे इस नाइंसाफी की खबर… Continue

Added by Ajay Singh on November 2, 2010 at 3:30pm — 4 Comments

मेरी ख्वाइश --दीपक बनना

अग्नि की लौ में सिमटकर क्यों न एक दीपक बन जाऊं

तम प्रकाश की बनकर जली तम का नाम मिटाऊं ,,



जलकर खुद ही दूजों को , मैं रोशन कर जाऊं

छोड़ स्वार्थ परोपकार में,मैं अपना जीवन बिताऊं ,,



खुद के आभाव मिटा सकूँ न पर दूजों के आभाव मिटाऊं

जीता रहूँ दूजो के लिए , दूजों के लिए ही मर जाऊं ,,



ज्वाला है दीपक की रानी ,गीत ज्वाला के गाऊँ

गिने मुझे… Continue

Added by Ajay Singh on October 27, 2010 at 3:30pm — No Comments

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