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किसी का दिल से जो ख़ुश-आमदीद होता है (१०३ )

( 1212 1122 1212 22 /112 )
किसी का दिल से जो ख़ुश-आमदीद होता है
तो आँखों आँखों में गुफ़्त-ओ-शुनीद होता है

**
किसी के रू ब रू मुमकिन कहाँ है इश्क़ कभी
गवाह प्यार का कब चश्म-दीद होता है

**
नसीब में कहाँ मिलते हैं जश्न के मौक़े
कभी कभी कोई मौक़ा सईद होता है

**
जो पैरहन से ही दिखता जदीद है अक्सर
वो सिर्फ़ कहने की ख़ातिर जदीद होता है

**
चले जो शख़्स हमेशा रह-ए-सदाक़त पर
वही बशर तो जहाँ में मजीद होता है

**
उसी का ज़िक्र नज़र आता है फ़सानों में
बशर जो प्यार की ख़ातिर शहीद होता है

**
वो अपनी मौज में या फिर पनाह-ए-रब में रहे
फ़क़ीर ग़म कि ख़ुशी से बईद होता है

**
गुनाह-ओ-जुर्म की दुनिया से दूरियाँ रक्खे
उसी बशर का ज़माना मुरीद होता है

**
किया है इश्क़ वही जानता ये राज़ 'तुरंत '
कि लुत्फ़-ए-हिज्र भी कितना शदीद होता है
**
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |
22 /05 /2020
**
शब्दार्थ -ख़ुश-आमदीद=स्वागत ,गुफ़्त-ओ-शुनीद=चर्चा/बातचीत
चश्म-दीद=जो घटना पर उपस्थित हो ,सईद=पावन ,
पैरहन =वस्त्र ,जदीद=आधुनिक ,रह-ए-सदाक़त=सच्चाई की राह
मजीद=पूज्य ,प्रतिष्ठित , बईद= परे ,मुरीद =अनुयायी,प्रशंसक
शदीद=अत्यधिक 

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 25, 2020 at 11:24am

आदरणीय अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "  साहेब , खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 25, 2020 at 11:15am

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी 'तुरंत' आदाब।बहुत ही अच्छी ग़ज़ल कही है आपने ।बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 24, 2020 at 3:15pm

आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद'  साहेब , 

खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया | जी हाँ एक जगह ११२२ की जगह १२१२ होना चाहिए था ये टंकण त्रुटि हो गई है | बाद में ध्यान आई , कई ग्रुप में दुरुस्त कर दी। लेकिन यहाँ रह गई है ,अभी ठीक करता हूँ | 

 

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on May 24, 2020 at 2:45pm

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' साहिब, आदाब। इस सुंदर ग़ज़ल पर आपको ढेरों बधाई। शायद अरकान ग़लत लिखे गए हैं। दरअस्ल आपकी ग़ज़ल इस बह्र में है:
मुज्तस मुसम्मन मख़्बून महज़ूफ़ (महज़ूफ़ मुसक्किन)
1212 1122 1212 112 (22)

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