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नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी

एक महान राजा के राज्य में एक भिखारीनुमा आदमी सड़क पर मरा पाया गया। बात राजा तक पहुंची तो उसने इस घटना को बहुत गम्भीर मानते हुए पूरी जांच कराए जाने का हुक्म दिया।

सबसे बड़े मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जिसने गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश की। राजा ने उस लंबी-चौड़ी रिपोर्ट को देखा और आंखें छोटी कर संजीदा स्वर में कहा, "एक लाइन में बताओ कि वह क्यों मरा?"

सबसे बड़े मंत्री ने अत्यंत विनम्र शब्दों में उत्तर दिया, "हुज़ूर, क्योंकि वह भूखा था।"

सुनते ही राजा की आंखें चौड़ी हो गईं और उसने आंखे तरेर कर मंत्री को देखते हुए कहा, "मतलब... मेरे... राज्य में... कोई... भू...खाथा।" यह कहते समय राजा हर शब्द के बाद एक क्षण रुक कर फिर दूसरा शब्द कह रहा था।

मंत्री तुरंत समझ गया और बिना समय गंवाए उसने उत्तर दिया, "जी हुज़ूर। वह 'भू... खाता'। इसलिए मर गया। यही सच है कि उसने भू ज़्यादा खा लिया था।"

रिपोर्ट में उस अनुसार बदलाव कर दिया गया और उस राज्य में 'भू' नामक एक नए पकवान का अविष्कार हो गया, जो काजू-बादाम और शुद्ध घी से बनाया जाता था।

-0-

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on July 4, 2020 at 6:34pm

रचना पसंद कर उस पर अपनी टिप्पणी देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सर. साभार.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 29, 2020 at 9:38am

आ. भाई चंद्रेश जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on June 29, 2020 at 8:11am

रचना पसंद कर उस पर अपनी टिप्पणी देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी सर एवं आदरणीय समर कबीर जी सर. साभार.

Comment by Samar kabeer on June 24, 2020 at 2:41pm

जनाब चंद्रेश जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 23, 2020 at 9:28am

हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश जी। बहुत सारगर्भित एवम मारक लघुकथा।राजा की न्याय प्रणाली पर तीखा कटाक्ष। आज की शासन व्यवस्था को झकझोरती प्रतीकात्मक शैली की लाज़वाब प्रस्तुति।

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