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चाँदनी ,,,,,,,
चमकने लगे हैं
केशों में चाँदी के तार
शायद
उम्र के सफर का है ये
आखिरी पड़ाव
थोड़ा जलता
थोड़ा बुझता
साँसों का अलाव
क्षितिज पर साँझ की लाली
थक गया शायद
सफर में सफर का माली
पर आज भी
अरमानों की छोटी सी खिड़की में
वो
आज भी वैसी है
जैसी वो पहले थी
चाहत के
पहले पड़ाव पर चमकती
पूनम के चाँद की
हसीन चाँदनी
सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on March 11, 2021 at 8:22pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'JI सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 5, 2021 at 1:57pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on March 4, 2021 at 8:54pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on March 3, 2021 at 3:19pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई, बधाई स्वीकार करें ।

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