For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

221-1221-1221-122

हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी
कोने में पड़ा घर के परेशान हूँ मैं भी (1)

गर आप सरल होंगे तो आसान हूँ मैं भी
ज़ालिम हैं अगर आप तो हैवान हूँ मैं भी (2)

ये सूनी दिवारें ही मुझे घूर रहीं हैं
खाली है मकाँ भी मिरा सुनसान हूँ मैं भी (3)

गर मिल भी गए हम भी तो आबाद न होंगे
उजड़ा है अगर तू भी तो वीरान हूँ मैं भी (4)

आएगा किसी दिन वो लगाएगा ठिकाने
कमरे में पड़ा फालतू सामान हूँ मैं भी (5)

वो देखता रहता है मुझे यार हमेशा
इस घर का दरीचा है वो दालान हूँ मैं भी (6)

ख़्वाहिश न किया तू कभी मिलने की 'सालिक'
मालिक है वो इस चाल का दरबान हूँ मैं भी (7)

©सालिक गणवीर
*मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 557

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on September 30, 2021 at 12:38pm

गज़ल अच्छी लगी। पंक्तियों में लय अच्छी बनी है। 

बधाई

Comment by सालिक गणवीर on September 23, 2021 at 5:30am

उस्ताद-ए-मुहतरम समर कबीर साहिब

आदाब

ग़ज़ल पर आपकी शिर्क़त और सराहना के लिए हृदय से आभारी हूँ. आपकी क़ीमती  इस्लाह से ग़ज़ल सँवर गई है. ममनून हूँ. सलामत रहें.

Comment by Samar kabeer on September 22, 2021 at 3:06pm

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'हालत जो तेरी देखी है हैरान हूँ मैं भी'

इस मिसरे को उचित लगे तो यूँ कहें:-

'हालत ये तेरी देख के हैरान हूँ मैं भी'

'खाली है मकाँ भी मिरा सुनसान हूँ मैं भी'

इस मिसरे को यूँ कह सकते हैं:-

'इस ख़ाली मकाँ जैसा ही सुनसान हूँ मैं भी'

'गर मिल भी गए हम भी तो आबाद न होंगे
उजड़ा है अगर तू भी तो वीरान हूँ मैं भी'

शैर या ग़ज़ल कहने के बाद उस पर दो तीन बार ग़ौर किया करें, इस शैर में 'भी' शब्द का प्रयोग चार बार हुआ है,क्या आपकी निगाह में ये दुरुस्त है?, इस शैर को यूँ कहें:-

'हम दोनों यहाँ मिल के भी आबाद न होंगे

उजड़े हैं अगर आप तो वीरान हूँ मैं भी'

मक़्ता हटा दें, रदीफ़ से इंसाफ़ नहीं हुआ ।

Comment by सालिक गणवीर on September 18, 2021 at 5:05am

आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी

सादर अभिवादन

ग़ज़ल फर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए ह्रदय से आभार.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 17, 2021 at 8:46pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service