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क्या दबदबा हमारा है!

क्या दबदबा हमारा है!

लोक तन्त्र का सुख भोगेंगे
चुने गए हम राजा हैं

देश हमारा, मार्ग हमारा
हम ही इसके आका हैं

चाहे जितनी गाड़ी रक्खें
फुटपाथों पर, बीच सड़क

हमको भला कौन रोकेगा?
जन प्रतिनिधि ,बेधड़क, कड़क

आस-पास हैं गार्ड हमारे
ले बन्दूकें साथ चलें

डर से जन सहमे रहते हैं
क्या मजाल जो घात करें?

पिए शक्ति-मद हम मतवाले
करते नित्य बवाला हैं

संग चापलूसों का दल-बल
क्या दबदबा हमारा है!

मौलिक एवं अप्रकाशित





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Comment by Usha Awasthi on August 22, 2022 at 3:04pm

आदरणीय सुशील सरन जी, रचना पसंद आई जानकर हर्ष हुआ।

हार्दिक धन्यवाद आपका

Comment by Sushil Sarna on August 22, 2022 at 12:30pm
वाह आदरणीया जी बहुत सुंदर और सार्थक प्रस्तुति है
Comment by Usha Awasthi on August 17, 2022 at 12:03pm

अवनीश धर द्विवेदी जी, रचना सुन्दर लगने हेतु हार्दिक आभार आपका, सादर।

Comment by Awanish Dhar Dvivedi on August 16, 2022 at 10:02pm

बहुत सुन्दर रचना।

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