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भिखारी छंद -

 24 मात्रिक - 12 पर यति - पदांत-गा ला

साजन    के   दीवाने , दो   नैना   मस्ताने ।
कभी  लगें  ये  अपने ,  कभी  लगें  बेगाने ।।
पागल दिल को भाते, उसके सपन  सुहाने ।
खामोशी  की   बातें, खामोशी   ही   जाने ।।
                   =×=×=×=
रैन काल के सपने , भोर  लगें  अनजाने ।
अवगुंठन में बनते  , प्यार भरे  अफसाने ।।
बिन बोले ही होतीं  , जाने क्या-क्या बातें ।
मन से कभी न जातीं  , आलिंगन की रातें ।।

सुशील सरना /

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Sushil Sarna on November 17, 2022 at 11:04am
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 16, 2022 at 6:30pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on November 11, 2022 at 3:20pm
आदरणीय श्याम नारायण जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी
Comment by Shyam Narain Verma on November 11, 2022 at 10:48am
नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर

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