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कुछ क्षणिकाएँ : ....

कुछ क्षणिकाएँ : ....

बढ़ जाती है
दिल की जलन
जब ढलने लगती है
साँझ
मानो करते हों नृत्य
यादों के अंगार
सपनों की झील पर
सपनों के लिए

...................

आदि बिंदु
अंत बिंदु
मध्य रेखा
बिंदु से बिंदु की
जीवन सीमा

.......................
तृषा को
दे गई

दर्द
तृप्ति को
करते रहे प्रतीक्षा
पुनर्मिलन का
अधराँगन में
विरही अधर

भोर होने तक

......................

निर्जीव राहें
उदास दुआएँ
गतिहीन हवाएँ
शायद
चल दिया
एक अंत
अनंत की तलाश में


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 460

Comment

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Comment by Sushil Sarna on December 10, 2019 at 5:04pm

"आदरणीय   Samar kabeer' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।"

Comment by Samar kabeer on December 9, 2019 at 3:10pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on December 7, 2019 at 6:37pm

"आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।"

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 7, 2019 at 6:19am

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बहुत अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

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