For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222  1222  122

ज़माने भर में जितने हादसे हैं.
हमें ख़ामोश होकर देखने हैं.

किसी को चलने में दिक़्क़त न आए,
चलो इतना सिमट कर बैठते हैं.

मेरी बेबाकियों के रास्ते में,
मेरी कुछ ख़्वाहिशों के कटघरे हैं.

बिना जिसके हुआ था जीना मुश्किल,
उसी के होने से शिकवे गिले हैं.

तुम्हारी याद भी इक रोग है क्या,
तुम्हारे ख़त को छूते डर रहे हैं.

दलीले रह गई कमज़ोर मेरी,
वो अपनी बात कह कर जा चुके हैं.

तरक़्क़ी वाली ये दुनिया है ऐसी,
यहाँ अब हर किसी से फासले हैं.

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 77

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manoj kumar Ahsaas on July 5, 2020 at 4:32pm

आदरणीय अमीर साहब गजल पर ध्यान देने के लिए बहुत-बहुत आभार आपका सुझाव उत्तम है तुरंत पालन किया जा रहा है

सादर

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 5, 2020 at 1:47pm

जनाब मनोज कुमार 'अहसास' जी आदाब।शानदार ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।

//दलीले रह गई कमज़ोर मेरी,// समर सर बता ही चुके हैं, दलीलें बहुवचन है इसलिए गई को भी गईं कर लें। सादर। 

Comment by Manoj kumar Ahsaas on July 4, 2020 at 3:51pm

आदरणीय समर कबीर साहब

बहुत बहुत आभार सर आपकी सलाह के बिना मेरी हर ग़ज़ल अधूरी है आप कुशल से तो है ना थोड़ा रेस्ट कर लीजिए सर मैं आपसे पहले भी कहता रहा हूं आराम भी जरूरी है हार्दिक आभार सर

Comment by Manoj kumar Ahsaas on July 4, 2020 at 3:48pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार

जो टंकण त्रुटियां आपको दिखाई दें उन्हें बता भी दिया करें बड़ी कृपा होगी

सादर

Comment by Samar kabeer on July 4, 2020 at 3:19pm

जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

ये देख कर प्रसन्नता हुई कि इस बार आपने नुक़्ते लगाए हैं ।

'दलीले रह गई कमज़ोर मेरी'

इस मिसरे में 'दलीले' को "दलीलें" कर लें ।

यहाँ अब हर किसी से फासले हैं'

पारिवारिक कारणों से कुछ समय ओबीओ पर हाज़िर नहीं हो सकूँगा,सिर्फ़ तरही मुशाइर: में शिर्कत हो सकेगी, आपको कहीं मेरी ज़रूरत महसूस हो तो फ़ोन पर सम्पर्क कर सकते हैं ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 4, 2020 at 10:09am

आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव commented on Usha Awasthi's blog post शिवत्व
"सुंदर रचना पर बधाई स्वीकार करें आदरणीया"
4 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

मियाँ हमको ज़मीन-ओ-आसमाँ अच्छा नहीं लगता

बह्र- 1222×4मियाँ हमको ज़मीन-ओ-आसमाँ अच्छा नहीं लगताकहाँ जाए कि अब ये दो जहाँ अच्छा नहीं लगता…See More
11 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।""
13 minutes ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी मुसाफिर साहब तहेदिल से शुक्रिया"
21 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
32 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अछूतों सा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।"
1 hour ago
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अछूतों सा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )
"भाई लक्षण धामी 'मुसाफिर'सादर अभिवादन अलिफ वस्ल का शानदार इस्तेमाल कर आपने बढ़िया ग़ज़ल…"
1 hour ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"भाई बृजेश कुमार'ब्रज'सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post शिवत्व
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
7 hours ago
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post उसने पी रखी है
"आदरणीय श्री बृजेश कुमार 'ब्रज' जी  शुक्रिया।"
7 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service