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सदा - क्यों नहीं देते

221--1221--1221--122

1

आँखों में भरे अश्क गिरा क्यों नहीं देते

है दर्द अगर सबको बता क्यों नहीं देते

2

है जुर्म मुहब्बत तो सज़ा क्यों नहीं देते

गर रोग है तो इसकी दवा क्यों नहीं देते

3

तुम चाँद सितारों के तले उनको बुला कर

दिल में बसे चेहरे को दिखा क्यों नहीं देते

4

तूफ़ान से लड़ने का तुम्हें शौक़ है इतना

तो चप्पू समंदर में गिरा क्यों नहीं देते 

5 

अक्सर जो तुम्हें ठगते है छल और कपट से

इक बार उन्हें तुम भी दग़ा क्यों नहीं देते

6

सच्चाई अगर मुल्क में ज़िंदा है अज़ीज़ो

इन्साफ़ को फिर लोग सदा क्यों नहीं देते

7

क़ुदरत की तुम्हें फ़िक्र अगर इतनी है 'निर्मल

तो धरती को ख़ुश रंग बना क्यों नहीं देते


मौलिक व अप्रकाशित

रचना निर्मल

दिल्ली 

Views: 829

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Comment by Rachna Bhatia on January 17, 2023 at 9:03pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर भाई नमस्कार। हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 17, 2023 at 10:15am

आ. रचना बहन सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by Rachna Bhatia on January 16, 2023 at 6:34pm

आदरणीय तपन दुबे जी हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Tapan Dubey on January 16, 2023 at 4:26pm

बहुत खूब रचना जी, बड़ी अच्छी गजल हुई है। बधाई।

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