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क्षणिकाएँ - 3 - डा० विजय शंकर

भला आदमी है वो ,
भला करता है ,
सौदागरों की तरह ।

रहमदिल है वह
दुआ करता है
भिखारियों की तरफ ।

आशीर्वाद देता है वह
चढ़ावा चढ़ जाने के बाद
पुजारी है वह ।

सब कर देगा वह
सब पा लेने के बाद
वादा है उसका ,
नेता है वह ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on November 24, 2014 at 6:05am
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी , आपको क्षणिकाएँ पसंद आयी इसके लिए आभार एवं आपकी बधाई के लिए ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 24, 2014 at 6:03am
आदरणीय गणेशजी बागी जी , सबसे पहले तो आपका बहुत बहुत धन्यवाद " तरफ" मिसप्रिंट के लिए ध्यानाकर्षण हेतु , यह " तरह " ही है , इस भूल के लिए बहुत खेद है। आपको क्षणिकाएँ पसंद आयी इसके लिए आभार एवं आपकी बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 24, 2014 at 5:49am

आदरणीय विजय भाई , चार व्यवहारिक सच्चाइयों को बयान करती आपको चारों क्षणिकाओं के लिये बधाई ।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 23, 2014 at 5:51pm

//रहमदिल है वह
दुआ करता है
भिखारियों की तरफ ।//

शायद "तरफ = तरह" होना चाहिए।

सभी क्षणिकायें अच्छी लगीं, बधाई आदरणीय विजय शंकर जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 21, 2014 at 12:08am
रचना को स्वीकार करने के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी। बधाई के लिए धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 21, 2014 at 12:04am
रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी।
Comment by Hari Prakash Dubey on November 20, 2014 at 5:04pm

शानदार प्रस्तुति आदरणीय डा० विजय शंकर जी , हार्दिक बधाई

Comment by Shyam Narain Verma on November 20, 2014 at 1:07pm

" अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई ................. "

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 19, 2014 at 9:28pm
आदरणीय डॉ o गोपाल नारायण जी , आपके उत्साह वर्धन के लिए ह्रदय से धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 19, 2014 at 9:24pm
रचना को स्वीकार करने के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी , आपकी बधाई से हौसला बढ़ता है , सादर।

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