For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
बह्र - 212 212 212 212

गीत बुलबुल सुनाती रही रात भर
दिलरुबा को रिझाती रही रात भर

भाव ही नींद खाती रही रात भर
उसको मैं बस मनाती रही रात भर

ज़िंदगी से सुना गीत जो सारा दिन
उसको मैं गुनगुनाती रही रात भर

उनकी दिलकश अदा और दीवानगी
सोच मैं मुस्कुराती रही रात भर

तेरी पहली छुअन याद करके सनम
मन ही मन मैं लजाती रही रात भर

चाँद तकने दिया भूख ने कब किसे
रोटियाँ ही दिखाती रही रात भर

ख़्वाब में ख़ुशनुमा ज़िंदगी को दिखा
नींद पागल बनाती रही रात भर

बिन पज़ीराई जब जिस्म भोगा गया
अपना तकिया भिगोती रही रात भर

उनकी बाहों में जन्नत सा पाकर सुकूँ
ज़िंदगी मुस्कुराती रही रात भर

हारने जब लगा हौसला ज़ीस्त से
आस लोरी सुनाती रही रात भर

ज़ीस्त से जो हैं "राखी" ने पाए सबक़
उनको लिखती मिटाती रही रात भर
अप्रकाशित (मौलिक)




अप्रकाशित (मौलिक)

Views: 420

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 13, 2022 at 6:17pm

आदरणीया राखी जी जैसा कि समर साहब ने कहा है कि प्रयास अच्छा है...दूसरे शे'र का ऊला "भाव ही नींद खाती रही रात भर" मुझे लगता है भाव शब्द पुल्लिंग है...इसमें सुधार चाहिए... बाकी शुभ शुभ

Comment by Rakhee jain on November 29, 2022 at 8:55pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी हार्दिक आभार आपका

जी आदरणीय की कही हर एक बात को ध्यान में रखकर सुधार का प्रयास करती रहूंगी 

Comment by Rakhee jain on November 29, 2022 at 7:42pm

आदरणीय समर कबीर जी हृदय से आभार मार्गदर्शन के लिए

आपके समस्त निर्देशों को ध्यान में रखूंगी ग़ज़ल में तुरंत सुधार कर लेती हूं

हार्दिक आभार आपका

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 29, 2022 at 4:51pm

आ. राखी जी, अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है। हार्दिक बधाई। 

आ. भाई समर जी की बातों का संज्ञान लें।

Comment by Samar kabeer on November 29, 2022 at 2:40pm

मुहतरमा राखी जैन साहिब: आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

आपकी पिछली ग़ज़ल पर जो मैंने टिप्पणी दी थी उसका जवाब आपने अभी तक नहीं दिया? ख़ैर !

'जिस्म बाज़ार जब कर दिया हार के
दाम ख़ुद के लगाती रही रात भर'

कौन? भाव स्पष्ट नहीं हुआ, ग़ौर करें ।

'अपना तकिया भिगाती रही रात भर'

इस मिसरे में 'भिगाती' शब्द ठीक नहीं, सहीह शब्द है "भिगोती", देखें ।

'हाँफने जब लगा हौंसला जीस्त से'

इस मिसरे में 'हाँफने' शब्द उचित नहीं इसकी जगह "हारने" शब्द उचित होगा, ग़ौर करें और 'हौंसला' को "हौसला" लिखें ।

कुछ टंकण त्रुटियाँ :-

चांद--'चाँद'

रोटियां--'रोटियाँ'

सुकूं--'सुकूँ'

जीस्त--'ज़ीस्त'

सबक--'सबक़'

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
6 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service