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जे पी सरीखे नेता - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२२/२२१/ २१२२
किस काम के हैं नेता किस काम का ये शासन
इनके रहे  वतन  में  जब  नित्य  होनी अनबन।१।

**
किस बात से हैं  सेवक  कहते  पहन के खादी
निर्धन के घर  अगर  ये  डलवा  न पाये राशन।२।

**
अंग्रेज  थे  बुरे  या   चम्बल   के   चोर   डाकू
गर जो हो लूट खाना भर  देश का ही जनधन।३।

**
किस बात की हो चिन्ता  किस बात से परेशाँ
मथकर के दे रही  है  जनता इन्हें तो मक्खन।४।

**
जे पी  सरीखे  नेता  जनती  न  अब  सियासत
करता है आमजन को अब कौन बोलो अनशन।५।

**
अब फिर से  कोशिशें  कर  बँटवारा चाहते हैं
इनकी ही जिद से पहले बाँटा गया था आँगन।६।

**
मौलिक.अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 3, 2020 at 4:59am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए आभार ।

Comment by Samar kabeer on January 31, 2020 at 3:00pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।

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