For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

संकट इस वसुंधरा पर है...

विश्व आपदा में ईश्वर से प्रार्थना

हे मनुष्यता के पृतिपालक हे प्रति पालक हे मनुष्यता
क्या भूल हुई क्या गलती है अब क्षमा करो हे परमपिता।

अब राह दिखाओ दुनिया को मुश्किल सबकी आसान करो
हे कायनात के संचालक सारे जग का कल्याण करो।

ये कैसी विपदा है भगवन कैसा ये शोर धरा पर है
जो सदियों से जीवित है अब संकट उस परम्परा पर है।

जग त्राहि माम कर बैठा है नेतृत्व विफल है प्राणनाथ
शाखों के परिंदों को अपने इन्द्रियातीत मत कर अनाथ।

हे दसों दिशाओं के मालिक शहरों और गांवों के मालिक
आकाश में सूरज के मालिक धरती पर छांवों के मालिक।

साष्टांग दंडवत हूं महेश ये अन्न प्रलय अब रुक जाए
हे ब्रह्मलीन हे ब्रह्म तत्व के देवालय अब रुक जाए।

कितनी सुंदर रचना की है दुनिया की ये मिट न जाए
कण—कण से मेरी विनती है ये महाप्रलय अब रुक जाए।।

                        *********

बेबस हैं हम हे विश्वनाथ आह्वान आपका करते हैं
हर वस्तु यहां संदिग्ध लगे स्पर्श मात्र से डरते हैं।

अब विघ्न हरो हे महादेव देवाधिदेव हे जगदीश्वर
संकट में सारी पृथ्वी है अब आ जाओ आओ ईश्वर।

मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा और गिरिजाघर भी हैं बंद यहां
खारा है सलिल वायु की गति पड़ चुकी बहुत ही मंद यहां।

हे शक्तिपीठ हे भवप्रीता हे शूलधारिणी महातपा
हे रौद्रमुखी हे बहुलप्रिया हे पुरूषाकृति हे चामुंडा।

इक प्रश्न आज अस्तित्व और दुनिया की परम्परा पर है
हे आदिनाथ हे आदिशक्ति संकट इस वसुंधरा पर है।

मानव सभ्यता सशंकित है ये सारा भय अब रुक जाए
नित प्रतिपल होने वाला ये जीवन का क्षय अब रुक जाए

हे कृपानिधान परमसत्ता हे सृष्टि रचयिता परमतत्व
कण—कण से मेरी विनती है ये महाप्रलय अब रुक जाए।।

                        ***********

आकाश पड़ गया है काला धरती पर इसकी छाया है
संकेत सृष्टि का है अथवा ये काल चक्र की माया है।

हर तरफ मौत का साया है सारी दुनिया संकट में है

तू तो कहता है हे ईश्वर अस्तित्व तेरा कण कण में है।

घर में बैठे हैं लोग आज देखो कितनी फुर्सत में हैं
सड़कों पर बिखरा सन्नाटा पशु पक्षी भी हैरत में हैं।

इन्द्रियां नियंत्रित हैं जीवन साधक समकक्ष बदल डाला
इस बीमारी ने लोगों के जीवन का लक्ष्य बदल डाला।

सब असंतुष्ट थे व्याकुल थे बेचैनी सबके अन्दर थी
अब लगता है कुछ दिन पहले की दुनिया कितनी बेहतर थी।

हे महापिता डर खत्म करो ये क्रूर समय अब रुक जाए
हे आदितत्व के संचालक पंचत्व निलय अब रुक जाए।

ये करुण प्रार्थना है जग की ईश्वर इसको स्वीकार करो
कण से मेरी विनती है ये आपदा प्रलय अब रुक जाए।।

— (मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 51

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"//ये बुद्ध की कबीर की चिश्ती की है जमीनफिर आप भाँजते हैं क्यूँ तलवार ख्वामखाह//, लाजवाब शेर…"
13 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post गुरूर- लघुकथा
"इस सकारात्मक और उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ समर कबीर साहब"
16 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post गुरूर- लघुकथा
"इस सकारात्मक और उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी"
17 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post गुरूर- लघुकथा
"इस सकारात्मक और उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
18 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post अब नहीं- लघुकथा
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ रक्षिता सिंह जी"
18 minutes ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " shared their blog post on Facebook
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मजदूर अब भी जा रहा पैदल चले यहाँ-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार ।"
2 hours ago
Hariom Shrivastava posted a blog post

योग छंद

छंद विधान [20 मात्रा,12,8 पर यति,अंत 122 से]मन में हो शंका तो, खून जलाए।ऐसे  में  रातों को, नींद …See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मजदूर अब भी जा रहा पैदल चले यहाँ-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।  बह्र के विषय…"
2 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma posted a blog post

ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई

बह्र - मफऊल फाइलात मफाईल फाइलुन 221 2121 1221 212अन्धों के गांव में भी कई बार ख्वामखाहकरती है रोज…See More
2 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

ग़ज़ल ( अंधी गली के मोड़ पर.....)

 (221 2121  1221 212)अंधी गली के मोड़ पे सूना मकान हैतन्हा-सा आदमी अब इस घर की शान हैहमसे उन्होंने…See More
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post उनको न मेरी  फ़िक्र न रुसवाई का है डर(१०४ )
"आदरणीय Ram Awadh VIshwakarma जी,  खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का…"
15 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service