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मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...

एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकर

मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर,

 

जिनके चेहरे साफ दिखते हैं मगर दामन नहीं

शक उन्हें भी है तेरी ईमानदारी देखकर,

 

उम्रभर जो भी कमाया मिल गया सब खाक में

चढ गया फांसी के फंदे पर उधारी देखकर,

 

मुल्क में हालात कैसे हैं पता चल जाएगा

देखकर कश्मीर या कन्याकुमारी देखकर,

 

सर्द मौसम है यहां तो धूप भी बिकने लगी

हो रही हैरत तेरी दूकानदारी देखकर,

 

इस तरह के नोट चूरन में निकलते थे कभी

सब यही कहते दिखे कल दो हजारी देखकर,

 

देखने सूरत गया था आइने के सामने

आईना रोने लगा हालत हमारी देखकर।। # — (अतुल)

                           मौलिक व अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 15, 2016 at 7:33pm

वाह्ह्ह्हह वाह्ह्ह मजा आ गया इतनी उम्दा ग़ज़ल पढ़कर देर से पढने का खेद है दिल से बधाई लीजिये आद० अतुल जी .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 22, 2016 at 10:55am

आदरणीय अतुल भाई , वर्तमान पर बहुत अच्छी गज़ल कही है , बधाइयाँ स्वीकार करें । आदरणीय समर भाई जी की सलाह पर गौर कीजियेगा ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 21, 2016 at 9:27pm

जनाब अतुल साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
शेर 5 के सानी मिसरे में ऐबे -तनाफूर है ( हैरत -तेरी )
सही शब्द" दुकान / दुक्कान " है इस हिसाब से क़ाफ़िया " दूकानदारी "
नहीं बल्कि " दुक्का नदारी " होगा देख लीजियेगा

Comment by amod shrivastav (bindouri) on November 20, 2016 at 6:36pm
क्या गजब ढाया है शब्दों से अतुल जी आप ने ।
हूँ मै हतप्रभ आपकी कारीगरी को देख कर ।।।।
बधाई
सादर नमन
Comment by atul kushwah on November 20, 2016 at 5:20pm

Aadarneeya Samar kabeer sir. Mai Nirdesh pure karta hu.ashish banaye rakhen. sadar-Atul

Comment by atul kushwah on November 20, 2016 at 5:13pm
Comment by atul kushwah on November 20, 2016 at 5:11pm

Aadarneeya Mirza Hafiz Baig sahab..apka aabhar. dua aashish banaye rakhein. sadar-Atul

Comment by atul kushwah on November 20, 2016 at 5:10pm

Aadarneeya Dr Ashutosh Mishra sir..apka aabhar. shukriya. sadar-Atul

Comment by atul kushwah on November 20, 2016 at 5:09pm

Aadarneeya Dharmendra ji..apka tahedil se aabhar.shukriya sadar-Atul

Comment by atul kushwah on November 20, 2016 at 5:08pm

Aadarneeya Sheikh Shahzad Usmani sir, apka bahut bahut aabhar.

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