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रिमझिम - रिमझिम बदरा बरसे

रिमझिम - रिमझिम बदरा बरसे

अजहूँ न आए पिया रे..

ये बदरा कारे - कजरारे 

बार- बार आ जाएँ दुआरे

घर आँगन सब सूना पड़ा रे

सूनी सेजरिया रे

रिमझिम....

तन-मन ऐसी अगन लगाए

जो बदरा से बुझे न बुझाए )

अब तो अगन बुझे तबही जब

आएँ साँवरिया रे

रिमझिम...

छिन अँगना छिन भीतर आऊँ

दीप बुझे सौ बार जलाऊँ

पिया हमारे घर आएगें

छाई अँधियारी रे

रिमझिम .....

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on July 4, 2020 at 9:42am

आदाब , आ0 ,आपको  प्रस्तुति सुन्दर लगी , जान कर प्रसन्नता हुई ।

हार्दिक धन्यवाद आपको

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 3, 2020 at 11:03pm

आदरणीया ऊषा अवस्थी जी आदाब, इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर। 

कृपया ध्यान दे...

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