For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिल को झिंझोड़ा नहीं कभी- गजल

मापनी 

२२१/२१२१/१२२१/२१२१/२

पकड़ा किसी का हाथ तो छोड़ा नहीं कभी. 

जोड़ा जो रिश्ता प्यार का तोड़ा नहीं कभी. 

  

महँगा पड़ा है झूठ से लड़ना हमें मगर,

घुटनों को उसके सामने मोड़ा नहीं कभी. 

 

जितनी थी भूख चुग लिए दाने यहाँ वहाँ, 

चिड़िया ने पेट के लिए जोड़ा नहीं कभी.

 

रस्ता पकड़ के एक मैं चलता चला गया,

जोड़ा है सबको धर्म पे फोड़ा नहीं कभी 

 

अंदर हृदय में प्रेम का जगना कठिन न था, 

हमने ही उसके दिल को झिंझोड़ा नहीं कभी.

"मौलिक एवं अप्रकाशित" 

Views: 71

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 21, 2020 at 8:28pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार 

आपकी बारीक नजर को सलाम अरु हौसला अफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 21, 2020 at 8:27pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सादर नमस्कार 

आपकी विस्तृत समीक्षा पाकर अभिभूत हूँ 

जल्दी में मापनी गलत लिख गयी है, आपने सही कहा 

बाकी मैंने सुधार कर लिया है , इसी तरह मार्गदर्श करते रहिये सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 19, 2020 at 10:02am

आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । हिन्दी शब्दों का सुन्दर प्रयोग करे हुए उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई । 

शायद जल्दी में मापनी गलत लिख गयी है । मेरे हिसाब से 

२२१/२१२१/१२२१/२१२ होनी चाहिए । सादर....

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 18, 2020 at 10:14pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें।

//रस्ता पकड़ के एक मैं चलता चला गया,

जोड़ा है सबको धर्म पे फोड़ा नहीं कभी //  जनाब इस शैर के सानी मिसरे की भाषा और शिल्प बेहतर कर सकते हैं :

"सबके दिलों को जोड़ा है तोड़ा नहीं कभी"

//अंदर हृदय में प्रेम का जगना कठिन न था, 

हमने ही उसके दिल को झिंझोड़ा नहीं कभी.//  जनाब इस शैर के ऊला मिसरे की ज़बान सानी से जुदा है, यूँ कर सकते हैं :

"दिल में जगाना प्यार तो मुश्किल न था मगर" 

बसंत कुमार शर्मा जी आपने जो मापनी लिखी है उसकी एक बार फिर जाँच कर लें। सादर। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नोटबंदी का मुनाफा काले धन की वापसी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई दण्डपाणि नाहक जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए हार्दिक आभार ।"
2 hours ago
dandpani nahak commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नोटबंदी का मुनाफा काले धन की वापसी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post खंडित मूर्ति - लघुकथा –
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी संदेशपरक कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

नोटबंदी का मुनाफा काले धन की वापसी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२पेट जब भरता नहीं गुफ़्तार उसका दोस्तोढोइए अब और मत यूँ भार उसका दोस्तो।१।**नोटबंदी…See More
10 hours ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

खंडित मूर्ति - लघुकथा –

खंडित मूर्ति - लघुकथा –"सुमित्रा, यह लाल पोशाक वाली लड़की तो वही है ना जिसकी खबर कुछ महीने पहले…See More
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (उगलते भी नहीं बनता निगलते भी नहीं बनता)

1222-1222-1222-1222उगलते  भी  नहीं  बनता  निगलते  भी  नहीं  बनता हुई  उनसे  ख़ता  कैसी   सँभलते …See More
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"जनाब दण्डपाणि 'नाहक़' जी महायदा आम बोलचाल में इस्तेमाल होता है लेकिन सहीह उच्चारण वही है…"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो
"ग़ज़ल पे हौसलाफजाई के लिए शुक्रिया यादव जी..."
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत-तस्वीर तुम्हारी
"बहुत बहुत आभार आदरणीय यादव जी...."
yesterday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
""ओ बी ओ लाइव तरही मुशाइर:"अंक-124 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों का हार्दिक आभार व…"
Saturday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
" बहुत खूब आदरणीया  अंजलि जी .. अच्छी गज़ल के लिए ढेरों मुबारकबाद "
Saturday
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"उम्दा गज़ल की ढेरों मुबारकबाद अदरणीय सालिक गणवीर जी दूसरे शेर पर अच्छी इस्लाह हुयी ...."
Saturday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service