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प्यार में डूबने के बाद

कुर्क हो जाती है आत्मा मेरी तुम्हारी मुस्कान से हर बार
सुर्ख मधुर अधरों से गूंजा सा मेरा नाम जब पुकारती हो तुम

स्वेक्षा से अपने आप को को मरता हुआ सा देख सकता हु
मार डालो मुझे मृत्यु तुम्हारे अधरों पे लटका देख सकता हु

नित तुम्हारा नाम लेता हु चेहरा मस्तिस्क में लिए फिरता हु
हम तुम शब्दों के पुष्प उछाल रहे हैं दिल का स्पंदन जब्त सा है

मुक्त करो तुम्हारी यादो के भरोसे से संजोकर मुझे आज
तुम में पूरा डूबा मैं अब किनारे पर सूखने की कोशिश में हु

नहीं सोचता अकस्मात् मृत्यु क्यों हुई स्मृती की तुम्हारी
मैं तुम्हे क्यों बताऊ की अब भी एक तस्वीर साथ है तुम्हारी


तुम्हारा ------------आनंद वत्स

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on July 25, 2010 at 10:34am
कुर्क हो जाती है आत्मा मेरी तुम्हारी मुस्कान से हर बार
सुर्ख मधुर अधरों से गूंजा सा मेरा नाम जब पुकारती हो तुम

बहुत खूब आनंद जी....एकदम सही लिखा है आपने..... कहा गया है की प्यार की कोई भाषा नही होती लेकिन इसको जताने के लिए शब्दो की ज़रूरत तो होती ही है...और ठीक वही किया है आपने......बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने....ऐसेही लिखते रहे....
Comment by Anand Vats on July 22, 2010 at 5:12pm
आप सब का हार्दिक धन्यवाद|
राणा जी आपका आशीर्वाद बना रहे और मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त होता रहे |
Comment by Rashmi Rathi on July 21, 2010 at 2:36pm
बहुत ही खूबसूरत रचना है, अपने अंतर्मन के एहसासों का बड़ी ही सहजता से वर्णन किया है आपने Truly Fabulous.

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on July 18, 2010 at 1:41pm
सुन्दर भावनाओं को कलमबद्ध किया है आनंद भाई. अंतिम पंक्तियाँ एक प्रश्न खड़ा कर अकेला छोड़ कर चली जाती है...यही सुन्दरता भी है...परन्तु कहीं कही लगता है कुछ शब्द जबरन भरती किये गए है.

मुक्त करो तुम्हारी सुखद यादो के भरोसे से संजोकर मुझे आज
मुक्त करो अपनी यादों के.......

इसके अतिरिक्त एक दो जगह वर्तनी सम्बन्धी त्रुटियाँ है........ दूर कर ले.
Comment by आशीष यादव on July 17, 2010 at 6:25pm
बहुत अच्छी कविता रची है आपने. मुझे आशा नहीं पूर्ण विश्वाश है आप आगे भी हम लोगो को ऐसी कविताएँ परोसते रहेंगे. उत्तम

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 17, 2010 at 4:44pm
आनंद वत्स जी बहुत ही खुबसूरत कविता रचा है आपने , सुंदर सुंदर शब्दों का सुन्दरता से प्रयोग कविता को लज्जत प्रदान कर रहा है , अंतिम दो पक्तिया पूरे कविता की जान लग रही है, बहुत खूब , बधाई इस अनुपम कृति के लिये ,

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