For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-मिलती दुआ है

1222/122

1

 हुआ वो ही ख़फ़ा है

किया जिसका भला है

2

ज़माने को पता है

तू मेरा आश्ना है

3

बसर करना जहाँ में

हुआ दुश्वार सा है

4

ख़यालों का समंदर

किनारा ढूँढता है

5

जफ़ाओं का ये तुहफ़ा

किसी की बद-दुआ है

6

बिना उल्फ़त के जीना 

कसम से इक क़ज़ा है

7

मेरी ईमानदारी

प हर कोई हँसा है

8

ज़बाँ की तल्ख़ियाँ ही

बढ़ातीं फ़ासला है

9

है ख़ुशक़िस्मत वो 'निर्मल'

जिसे मिलती दुआ है

 

मौलिक व अप्रकाशित

 

Views: 494

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rachna Bhatia on September 6, 2021 at 3:22pm

आदरणीय समर कबीर सर् , मैं भी इसी शे'र को ठीक करना चाहती थी ।पर,हुआ नहीं। आपने बहुत अच्छा कर दिया।

बेहद शुक्रिय:।

Comment by Samar kabeer on September 6, 2021 at 11:39am

'घटाया कब उन्होंने

बढ़ाकर फ़ासला है'

यूँ कहें:-

'ज़बाँ की तल्ख़ियों ने

बढ़ाया फ़ासला है'

Comment by Rachna Bhatia on September 6, 2021 at 11:19am

आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी सही कहा आपने। सुधरने की कोशिश कर रही हूँ।

Comment by Rachna Bhatia on September 6, 2021 at 11:18am

आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार। सर् फेयर में सुधार कर लेती हूँ।यहाँ एडिट करने से पोस्ट पैंडिंग में चली जाती है।

सर्,इस तरह से शे'र कर लें क्या

1222/122

घटाया कब उन्होंने

बढ़ाकर फ़ासला है

Comment by Samar kabeer on September 6, 2021 at 7:25am

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, छोटी बह्र में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'कसम से इक क़ज़ा है'

इस मिसरे में 'क़ज़ा' की जगह "सज़ा" शब्द उचित होगा ।

'कसम'--"क़सम"--कब सीखेंगी?

'ज़बाँ की तल्ख़ियाँ ही

बढ़ातीं फ़ासला है'

इस शे'र में 'तल्ख़ियाँ' शब्द बहुवचन होने से रदीफ़ 'है' की बजाय "हैं" हो रही है, सुधार का प्रयास करें ।

Comment by मनोज अहसास on September 5, 2021 at 10:56pm

नमस्कार आदरणीय ऐसा प्रतीत होता है कि आपने बहर के हिसाब से शब्दों को बिठाया है अभी आपको बहर पर मेरे ख्याल से और अधिक मेहनत करनी चाहिए बाकी भाव आपके बहुत अच्छे हैं और एक अच्छी गजल की बधाई आपको देता हूं

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
4 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
5 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
5 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
10 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
12 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
14 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
15 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
15 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
16 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
16 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
16 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service