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पिता - दोहे

दोहे -पिता
*****
पिता एक उम्मीद सह, हैं जीवन की आस
वो हिम्मत परिवार की, हैं मन का विश्वास।१।
*
जीवन जग में तात ही, केवल ऐसा गाँव
सघन शीत जो धूप दें, और धूप में छाँव।२।
*
जो करते सुत को सरल, जीवन की हर राह
अनुभव से अर्जित हमें, देकर सीख अथाह।२।
*
डाँट-डपट करते भले, भोर, दिवस या रात
सम्बल सबके पर रहे, कठिन समय में तात।४।
*
नित सुख में परिवार हो, होती मन में चाह
हँसते -हँसते झेलते, इस को पीर अथाह।५।
*
पत्थर से व्यवहार में, अन्तस को रख नर्म
हर इच्छा की पूर्ति ही, तात समझते धर्म।६।
*
तन की दूरी हो भले, हमसे कितने कोस
वो दुख अपने पास रख, देते हर्ष परोस।७।
*
वो जीवन की रीत है, वो ही मन के मीत
सिर्फ न पालनहार वो, हैं जीवन संगीत।८।
*
मौलिक/अप्रकाशित
- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 23, 2022 at 12:19pm

आ. भाई नाथ सोनांचली जी सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by नाथ सोनांचली on June 22, 2022 at 8:27pm

आद0 लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर" जी सादर अभिवादन

पिता पर बढ़िया दोहावली हुई है। 

पत्थर से व्यवहार में, अन्तस को रख नर्म

हर इच्छा... 

क्या कहने,, बहुत खूब।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 22, 2022 at 6:34pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति व स्नेह के लिए हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 20, 2022 at 11:46am
वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर और सार्थक दोहावली हुई है ।हार्दिक बधाई सर

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