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नए साल में - गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

पूछ सुख का पता फिर नए साल में
एक निर्धन  चला  फिर नए साल में।१।
*
फिर वही रोग  संकट  वही दुश्मनी
क्या हुआ है नया फिर नए साल में।२।
*
बात यूँ तो  विगत भी रही अनसुनी
किसने माना कहा फिर नए साल में।३।
*
लोग नफरत  पहन  दौड़ते जा रहे
जब वही है हवा फिर नए साल में।४।
*
मैं न स्वागत  न  तू दोस्ती कर रहा
कौन सीखा बता फिर नए साल में।५।
*
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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