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ग़ज़ल :- तलवार की बातें करो छोडो मयान की

ग़ज़ल :- तलवार की बातें करो छोडो मयान की

अब क्या बताएं आपको दुनिया जहान की ,

ये शायरी ज़ुबां है किसी बेज़ुबान की |

 

शहरों की चकाचौंध में अब लेगा खबर कौन ,

उस गाँव के रोते हुए बूढ़े मकान की |

 

बेहद घुटन भरा है तरक्की तेरा लिबास ,

पहचान तलक मिट गयी दीन-ओ-ईमान की |

 

ज्वालामुखी की राख में चिंगारियां भी हैं ,

हिम्मत है तो छू  ले हवा आंधी तूफ़ान की |

 

जागी हुई कौमों से सुलह व्यर्थ की कोशिश ,

तलवार की बातें करो छोड़ो मयान की |

 

ओहदा था जितना ऊँचा फ़िक्र उतनी तंग थी ,

होती है चीज़ फीकी ही ऊँची दुकान की |

 

         - अभिनव अरुण  {310811}

 

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Comment by Abhinav Arun on September 5, 2011 at 6:40am
apke prati hardik abhaar kailash ji.
Comment by Kailash C Sharma on September 3, 2011 at 7:53pm

बेहद घुटन भरा है तरक्की तेरा लिबास ,

पहचान तलक मिट गयी दीन-ओ-ईमान की |

 

बहुत सटीक भाव...लाज़वाब प्रस्तुति..

Comment by Abhinav Arun on September 2, 2011 at 1:23pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया मोनिका जी एवं वंदना जी !!

Comment by monika on September 1, 2011 at 5:27pm

शहरों की चकाचौंध में अब लेगा खबर कौन ,

उस गाँव के रोते हुए बूढ़े मकान की |

मन को छू लेने वाली पंक्तिया बहुत खूब रचना. बधाई स्वीकार करे.

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