For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हिंदी को समर्पित दोहे.


मठाधीश सब हिंदी के,करते ऐसा काज.
हिन्दीभाषी कहलाते,आती हमको लाज.

हिंदी दिवस कहे या फिर सरकारी अवसाद.
अपने भाई-बन्दों  में,बंटता है परसाद. 

हिंदी का जिन सूबों में,होता गहन विरोध.
राजनीती सब छोड़ के,करिए इस पर शोध.

अंग्रेजी का हम कभी,करते नहीं विरोध.
पर हिंदी की रह में,बने नहीं गतिरोध.

हिंदी अपने बूते पे,ले आई सम्मान.
भाषा ये बाज़ार की,बिकता है सामान.

मै तो ठहरा नासमझ,और न बोला जाय.
हिंदी-मर्म विशाल है,कौन किसे समझाय.

अविनाश बागडे.

Views: 525

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by AVINASH S BAGDE on November 15, 2011 at 11:02am

Arun'abhnav' ji aapke shabd-bal hetu aapka aabhar.

Comment by Abhinav Arun on November 14, 2011 at 4:05pm

sahi kakha avinash ji hindi politics kee shikaar ho gayi hai varna har hinidustani is bhasha se pyaar karta hai ab vote ke liye kaee south ke politician bhi achchhe hindi jaan aur seekh rahe hai -

हिंदी का जिन सूबों में,होता गहन विरोध.
राजनीती सब छोड़ के,करिए इस पर शोध.
 
badhai is rachna ke liye
Comment by AVINASH S BAGDE on November 14, 2011 at 12:46pm

| क्या कहा जाय किससे कहा जाय, आजादी के इतने दिनों बाद भी हिंदुस्तान में हिंदी राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं पा सकी |..shukriya Bagi ji.

 

Siya Sachdev ji AABHAR.

Comment by siyasachdev on October 4, 2011 at 10:11pm

behed khoobsurat dohe ..sache aur achche shabdo mein saje hue ..wah..bahut khoob


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 4, 2011 at 9:30am

आदरणीय बागडे साहब, आप ने चंद दोहों के माध्यम से करोड़ों हिंदी प्रेमियों के दिल की बात कह दी है | हिंदुस्तान में हिंदी का विरोध कही न कही उनके दिवालियापन को है, जिस स्थान पर हिंदी आधारित व्यवसाय के बल पर लोग दुनिया में अपनी पहचान बनाये है वहां पर हिंदी में शपथ ग्रहण करने पर कुछ मानसिक बीमार लोग विरोध किये थे | क्या कहा जाय किससे कहा जाय, आजादी के इतने दिनों बाद भी हिंदुस्तान में हिंदी राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं पा सकी |

बहुत बहुत बधाई इस खुबसूरत अभिव्यक्ति हेतु |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2011 at 11:45pm
प्रयास हेतु साधुवाद ..
 
मैं तो ठहरा नासमझ, और न बोला जाय.
हिंदी-मर्म विशाल है,कौन किसे समझाय.
इसके अलावे अन्य दोहे निर्दोष नहीं है, अविनाशजी.
दोहे 13:11 की मात्रा में होते हैं तथा मध्य युति होता है.  
Comment by AVINASH S BAGDE on October 3, 2011 at 8:36pm

SUDHI JANO IS PAR AAPKA SNEH AAMANTRIT HAI

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गिरह सहित सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112**बिसलरी पा  नदी को भूल गयाहर अधर तिस्नगी को भूल गया।१।*पथ की हर रौशनी को भूल…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन।"
5 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला वो किसी को भूल गय इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा रात को इक और फिर रात…"
9 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन "
10 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"स्वागतम"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service