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जगजीत सिंह को मेरी खिराज ए अकीदत (श्रद्धांजली)

 क़लम रुक रही है बहर खो रही है,
खड़ी है मुसलसल गज़ल रो रही है।

मुझे यूं ग़ज़ल से मुखातिब कराया,
तरन्नुम से मेरा जहाँ जगमगाया,
तुझे सुन मिरे दिल के अरमान जागे,
तूही चल दिया तोड़ कच्चे ये धागे,
सभी को गुज़रना है मुझको पता है,
मुझे पर तसल्ली नहीं हो रही है
क़लम रुक रही है बहर खो रही है,
खड़ी है मुसलसल गज़ल रो रही है

खुदा ने गमों की वो आँधी चलाई
जिगर है शिकस्ता न तसकीन पाई,
सुकूँ तुझसे पाया कभी दिल जो टूटा,
तिरी शायरी सुन मिरा वक़्त बीता,
अदब का तुझी से समन्दर रवाँ था,
तू हामी ए उर्दू, तू शीरीं ज़बां था,
आलूद गौहर से सारी निगाहें,
के रूहे मुबारक तिरी सो रही है,
क़लम रुक रही है बहर खो रही है,
खड़ी है मुसलसल गज़ल रो रही है।

मुसलसल-लगातार, शिकस्ता-हारे हुये, शीरीं ज़बाँ-मीठी बोली वाला, आलूद गौहर से-आँसू भरी।

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Comment by AVINASH S BAGDE on October 16, 2011 at 3:32pm

सभी को गुज़रना है मुझको पता है,
मुझे पर तसल्ली नहीं हो रही है
क़लम रुक रही है बहर खो रही है,
खड़ी है मुसलसल गज़ल रो रही है....very nice imran bhai...shandar.

Comment by इमरान खान on October 14, 2011 at 2:37pm

बेहद शुक्रिया @मोहतरमा लता साहिबा, @मोहतरम जनाब बागी साहब और @मोहतरम जनाब मापतपुरी साहब.

Comment by satish mapatpuri on October 14, 2011 at 12:37am

क़लम रुक रही है बहर खो रही है,
खड़ी है मुसलसल गज़ल रो रही है

बहुत खूब इमरान साहेब .................. मखमली आवाज़ के ग़ज़लों के  बेताज बादशाह को मैं अपनी बिनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूँ


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 13, 2011 at 9:28pm

इमरान भाई, सच कहा आपने, जगजीत सिंह को सुनने के बाद ही मुझ सहित कई मित्र अवश्य ही ग़ज़ल की तरफ आकर्षित हुए होंगे, श्रन्धांजलि स्वरूप यह नज्म सच में आँखों को भिगाने के लिए पर्याप्त है, गायकी की दुनिया ने एक बहुत बड़ा सितारा खो दिया है | ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे |

Comment by Lata R.Ojha on October 13, 2011 at 3:51pm

Ghazal se sabko waakif karaaya..nayi peedhi ko apna mureed banaaya ..aur chal diye..meri shraddhaanjali :)

 

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