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आज तिमिर का नाश हुआ
दीपों की लगी कतार
कार्तिक अमावस्या लेकर आई
यह आलोकित उपहार

द्वार द्वार पर दीप जलें
घर घर हुआ श्रृंगार
हर देहरी प्रदीप्त हुई
बिखरा हर्ष अपार

झाड़ बुहार आँगन को
लक्ष्मी को दें आमंत्रण
करबद्ध हो सब करें
मन से रमा का वंदन

सभी को शुभ दीपावली...
दुष्यंत..........

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Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on November 1, 2011 at 11:44pm

भाई दुष्यंत जी ! आपकी कविता बहुत खूबसूरत है .......इस निमित्त हार्दिक बधाई मित्र .....दीपावली की शुभकामनायें !

Comment by Abhinav Arun on October 30, 2011 at 3:34pm

प्रकाशपर्व पर अति सुन्दर प्रभावशाली रचना !!

Comment by दुष्यंत सेवक on October 27, 2011 at 10:50am

dhanyavaad sir, naya varsh aap ke liye sukh samriddhi evam shree dayak ho...yahi mangal kaamna hai....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 27, 2011 at 7:03am

दीपावली आयी.. हुई और मन में रह गयी.  शुभ-शुभ होता रहे.

शुभेच्छा

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