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घर शिफ्टिंग के दौरान एक पुरानी diary हाथ लगी और गर्द झाड़ी तो यह रचना नमूदार हुई. इस पर तारीख अंकित थी 12-8-1999...मैने सोचा कच्ची उम्र और कच्ची सोच की यह रचना के सुधि पाठकों की नज़र की जाए.

तुम्हारी जो ख़बर हमें है
वो किसी और के पास कहाँ
देख लेता हूँ कहकहों में भी
आंसू के कतरे
ऐसी नजर किसी और के पास कहाँ

ज़माने ने ठोकरें दी पत्थर समझकर
तुने मुझे सहेज लिया मूरत समझकर
होगी अब हमारी गुजर
किसी और के पास कहाँ

उम्र भर देख लिया
बियाबान में भटक कर
हासिल हुआ कुछ नहीं
दुनिया में अटककर
तूने की जैसी कदर
किसी और के पास कहाँ

रास्ता दिखा दिया तुने
मेरे भटकाव को
साहिल पे ला दिया
थपेडों से नाव को
मुझ पर जितना तेरा असर
किसी और के पास कहाँ

दुष्यंत .......

Views: 455

Comment

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Comment by दुष्यंत सेवक on September 15, 2011 at 11:04am

siya ji....apko yah tutlati kalam se nikli rachna bhi achchi lagi iske liye abhar ...halanki isme sudhar ki jo gunjaish hai use bhi ingit karen taaki is manch ki garima anusar ise dhaal saken...

Comment by दुष्यंत सेवक on September 15, 2011 at 11:04am

adarneey bagi jee....koshish karunga....vaise ek baat aur batau ki ye rachna us samay ki hai jab shilp, bhaav aur kavya ke niyam aadi astitva me bhi hain iski bhi jankari mujhe nahi thi... :)....baharhaal jab se inka astitva jaana hai tb se inhe apnakar sanvarne ki koshish kar raha huun. :) apko yah angadh prayas pasand aaya is hetu hardik aabhar...


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 15, 2011 at 10:30am

भाई दुष्यंत जी, यह रचना आपने भले ही खेलने कूदने के दिनों में रचे हो, किन्तु इस रचना का भाव बहुत ही बढ़िया है, अभी जरा सा अनगढ़ जैसा लग रहा है किन्तु आप यदि गढ़ना चाहे तो अभी भी इसे गढ़ सकते है और चमक और भी ला सकते है | बधाई स्वीकार करे इस रचना पर | 

Comment by siyasachdev on September 14, 2011 at 6:25pm

behtareen rachna dushyant ji..khoobsurat alfaaz..umda

Comment by दुष्यंत सेवक on September 14, 2011 at 4:05pm

pahli pratikriya ke liye hardik dhanyvaad kailash ji. 

Comment by Kailash C Sharma on September 14, 2011 at 3:24pm

ज़माने ने ठोकरें दी पत्थर समझकर
तुने मुझे सहेज लिया मूरत समझकर
होगी अब हमारी गुजर
किसी और के पास कहाँ

 

.....बहुत खूब ! बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

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