For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दुष्यंत सेवक
  • Male
  • Pune
  • India
Share on Facebook MySpace

दुष्यंत सेवक's Friends

  • MAHIMA SHREE
  • विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी
  • सुनीता शानू
  • Yogyata Mishra
  • प्रदीप सिंह चौहान
  • Er. Ambarish Srivastava
  • Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
  • Rohit Singh Rajput
  • Nisha
  • PAYAL SHARMA
  • swati kapoor
  • Akshay Sharma
  • Rana Pratap Singh
  • vipin prajapati
  • srijan

दुष्यंत सेवक's Discussions

आम आदमी के शायर को नमन
4 Replies

मशहूर शायर अदम गोंडवी उर्फ रामनाथ सिंह का रविवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया। 'काजू भुनी प्लेट में व्हिकी भरी गिलास में,…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Dec 24, 2011.

 

दुष्यंत सेवक's Page

Latest Activity

दुष्यंत सेवक replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 153 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय संचालक महोदय, ओबीओ के सभी सुधिजन, आशा करता हूँ आपको यह पुराना साथी याद होगा। आज तकरीबन ९ वर्षों बाद इधर की राह ली। बस बैठे-बैठे याद आया कि लिखने-पढ़ने के जब दिन थे, तब यहाँ की महफ़िलों में ख़ूब सुख उठाया है। देखकर इतनी प्रसन्नता हुई कि मेरा…"
Jan 20, 2024
दुष्यंत सेवक replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 153 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय संचालक महोदय, प्रस्तुत है मेरी एक अनगढ़ रचना 🙏🏾 मॉल और गार्डन शहर के, सुख उनमें यह कहाँ भला कच्ची मढ़ी ये गाँवों की दे, छाँह घनी और शीतला कर किलोल आह्लादित रहते, गाँव के ये नन्हें छौने देखकर इनके खुश चेहरे, सुख अपने लगते बौने"
Jan 20, 2024

Profile Information

Gender
Male
City State
Pune, Maharashtra
Native Place
Mehidpur, Madhyapradesh
Profession
Creative Advisor
About me
Ex Reporter Dainik Bhaskar, now a copywriter in an ad agency at indore...

दुष्यंत सेवक's Blog

सज़ा

शब्दों की जुगाली
करत रहा मनवा ये मवाली
लुच्चे से ख़यालात
लफंगे से अहसास
बदमाश जज़्बात
सोच रहा हूँ
सुना दूं इन्हें
उम्रकैद की सज़ा
डायरी के पन्नों में

Posted on April 21, 2012 at 5:27pm — 9 Comments

हाइकु

१. मनमीत रे 

    धोरे हो गए केश 
    मन रंगीला 
२. मनमीत रे 
    जग ने बिसराया
    तू ही संग है 
३. मनमीत रे 
    छोटी सी ये दुकान 
    जग अपना 
४. मनमीत रे 
    उम्र का है ढलान 
    नेह बढ़ाएं 
५. मनमीत रे 
    धन की नहीं आस 
    प्रीत है धन 
६. प्रियतमा री 
    मीठा लागे चुम्बन 
    भिगोया मन 
७.…
Continue

Posted on February 18, 2012 at 5:30pm — 5 Comments

आज तिमिर का नाश हुआ

आज तिमिर का नाश हुआ
दीपों की लगी कतार
कार्तिक अमावस्या लेकर आई
यह आलोकित उपहार

द्वार द्वार पर दीप जलें
घर घर हुआ श्रृंगार
हर देहरी प्रदीप्त हुई
बिखरा हर्ष अपार

झाड़ बुहार आँगन को
लक्ष्मी को दें आमंत्रण
करबद्ध हो सब करें
मन से रमा का वंदन

सभी को शुभ दीपावली...
दुष्यंत..........

Posted on October 24, 2011 at 6:38pm — 4 Comments

किसी और के पास कहाँ

घर शिफ्टिंग के दौरान एक पुरानी diary हाथ लगी और गर्द झाड़ी तो यह रचना नमूदार हुई. इस पर तारीख अंकित थी 12-8-1999...मैने सोचा कच्ची उम्र और कच्ची सोच की यह रचना के सुधि पाठकों की नज़र की जाए.

तुम्हारी जो ख़बर हमें है

वो किसी और के पास कहाँ

देख लेता हूँ कहकहों में भी

आंसू के कतरे

ऐसी नजर किसी और के पास कहाँ



ज़माने ने ठोकरें दी पत्थर समझकर

तुने मुझे सहेज लिया मूरत समझकर

होगी अब हमारी गुजर

किसी और के पास कहाँ



उम्र भर देख लिया

बियाबान में…

Continue

Posted on September 13, 2011 at 6:44pm — 6 Comments

Comment Wall (16 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:39am on May 24, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकमनाएं 

At 12:25pm on March 28, 2012, MAHIMA SHREE said…
दुष्यंत जी नमस्कार आपको प्रतियोगिता में सफल होने के लिए बहुत-२ बधाइयाँ ...
At 8:56pm on January 2, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…

मै आपका बहुत ही आभारी हूँ की आपने मेरी कविता की सराहना करके मेरा उत्साह वर्धन किया

At 10:40am on May 24, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 9:52am on May 24, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
MANY MANY HAPPY RETURNS OF THE DAY DUSHYANT BHAI...
At 12:58am on August 5, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…
badhai ho dushyant jee....aapki rachna ko july mahine ka sarvasresth blog chune jane par bahut bahut badhai hooo
At 12:43am on August 5, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…
Dushyant ji badhai ho
At 12:23am on August 5, 2010, Admin said…
आदरणीय श्री दुष्यंत सेवक जी,
प्रणाम,
मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है की आपकी रचना को जुलाई महीने के लिये " महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग " चुना गया है, आपको ओपन बुक्स परिवार की तरफ से बहुत बहुत बधाई, माँ सरस्वती आपकी कलम को ताकत दे, धन्यवाद |
At 8:08pm on May 24, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 7:37pm on May 24, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…
MANY MANY HAPPY RETURNS OF THE DAY DUSHYANT JEE...

I WISH ALL YOUR DREAMS COME TRE THIS DAY...
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service