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तू कभी मुश्किलों से डरना मत
या मेरी राह से गुजरना मत

दर्द जीवन में मिले तो उसको
समेट लेना मगर बिखरना मत

सुलाया खंजरों के बिस्तर पर
और कहते है आह भरना मत

मैंने ये तो नही कहा तुमसे
न रहूँ मैं तो तुम संवारना मत

मै बहकने लगूं कभी भी अगर
तुमको मेरी कसम संभलना मत

आतिश-ए-इश्क से भरा हूँ मैं
मोम है तू मगर पिघलना मत


............................................ अरुन श्री !

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Comment by mohinichordia on December 5, 2011 at 2:24pm

 सुलाया खंजरों के बिस्तर  पर औरकहते हैं आह भरना मत ,बहुत खूब अरुण श्री जी 

Comment by आशीष यादव on December 1, 2011 at 2:21pm

ek sundar si ghazal padhne ko mili. 

badhai aapko.

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