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दोहे सुनकर जीत के, मन को लेंगे जीत.

प्रेम मिलेगा आपको, साथ निभाए प्रीत..

 

सोमवार में पूज्य हैं, हम सबके शिवनाथ.

मंगल जो सुमिरन करे, बजरंगी हों साथ.

 

बुद्ध दिनों में शुद्ध अति, मिले त्याग उपदेश.

गुरु को गुरु पूजन करें, दूर रहें सब क्लेश..

 

शुक्रवार को साधिए, मन में हो संतोष.

शनि पूजन शनिवार जो, मिटे तभी सब दोष.

 

मन प्रसन्न रविवार को, सुख मिलता भरपूर.

सूर्य देव की हो कृपा, कष्ट सभी हों दूर..

 

छंदों से ली प्रेरणा, गुनकर हुए मनीष.

अम्बरीष गुरुदेव का, हमें मिला आशीष..

--जीत गौरव अवस्थी सीतापुर |

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Comment

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on March 3, 2012 at 10:20am

इस सुन्दर  दोहावली के लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें बंधुवर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 27, 2012 at 9:12pm

bade manbhavak ,pavak dohe hain.

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