For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बुझना ही होता है

वोह जाना चाहते थे दूर

किनारा कर किया हमनें
न हो तकलीफ उनको
यह ईरादा कर लिया हमनें 
वोह जाना चाह----------
बड़ा मुश्किल था जीना क्या करें
कुछ कर नहीं सकते
दिल अपना ग़मों से यूँ ही 
खुद ही भर लिया हमनें
वोह जाना चाह-------------
मैं 'दीपक' हूँ जलूँ कितना 
मुझे बुझना ही होता है
हवाओं के भरे गुलशन में 
बनाया आशियाँ हमने 
वोह जाना चाह------------
दीपक 'कुल्लुवी' 
9350078399
२६/०३/१२.

Views: 150

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on March 28, 2012 at 10:07am

bagi it was liya...mistakenly wrote kiya

thanks


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 27, 2012 at 8:46pm

किनारा कर किया हमनें

न हो तकलीफ उनको
मुझे लग रहा है की कही न कही टंकण त्रुटी है शायद आप किया =लिया होना चाहिए था

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on March 27, 2012 at 11:56am
शुक्रिया डा0 प्राची 
हमनें तो पायी सज़ा अपनी ही शराफत की
सच कहा है नहीं आसाँ राहें उल्फ़त की
दीपक 'कुल्लुवी' सा उन्हें शायर नादान मिला 
बस मुहब्बत का यह ईनाम मिला 
दीपक 'कुल्लुवी'

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 27, 2012 at 11:13am

मैं 'दीपक' हूँ जलूँ कितना 

मुझे बुझना ही होता है
हवाओं के भरे गुलशन में 
बनाया आशियाँ हमने ...bahut hi khaas bahut kuch kahti tyaag se samarpit alfaaj.
Comment by Deepak Sharma Kuluvi on March 27, 2012 at 10:11am
नीरजा जी प्रदीप जी रविन्द्र जी 
             शुक्रिया 

मैं दीपक हूँ तिल तिल जलता करता रौशन अंधियारों को

राख और धुआं ही मिलता है मेरे हिस्से के उजालों को 
'कुल्लुवी'
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 26, 2012 at 9:08pm

मैं 'दीपक' हूँ जलूँ कितना 

मुझे बुझना ही होता है
हवाओं के भरे गुलशन में 
बनाया आशियाँ हमने 
वोह जाना चाह------------
bahut sundar prastuti vah, aadarniya dipak ji, sadar abhivadan ke sath badhai.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )

ग़ज़ल (1222 1222 1222 1222 ). मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत भरोसा कीजिए मज़बूत इक दीवार की…See More
29 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई रामबली जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए धन््वादद।"
35 minutes ago
Dayaram Methani commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"सफलता के शिखर पर वे खड़े हैंसदा कठिनाइयों से जो लड़े हैं......अति सुुंदर मुखड़ा। जो प्यासी आत्मा को…"
1 hour ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है (११५ )
"भाई रामबली गुप्ता जी , उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार  , मेरे विचार में…"
2 hours ago
रामबली गुप्ता commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"बढियाँ ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें भाई लक्ष्मण धामी जी"
2 hours ago
रामबली गुप्ता commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है (११५ )
"सुंदर सर्जना के लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय  कुछ जगह मुझे लगा शब्दों को बदला जाना चाहिए…"
3 hours ago
Neeta Tayal left a comment for Neeta Tayal
"मायका और ससुराल दोनों हैं तुल्य नारी जीवन में दोनों ही बहुमूल्य मायका वो है ,जहां बचपन बिताया शादी…"
3 hours ago
Neeta Tayal is now a member of Open Books Online
3 hours ago
रामबली गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल: मनोज अहसास
"मनोज जी ग़ज़ल पर प्रयास के लिए बधाई स्वीकारें।कुछ बाते- मिल सकता हो>मिल सकना हो कोई कह सकता…"
3 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"भाई लक्ष्मण धामी जी हार्दिक आभार"
3 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आदरणीय रवि भसीन जी प्रशंसा के लिएसादर धन्यवाद।आपने जो मिसरा सुझाया है वो बह्र में नहीं है। मेरा…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
6 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service