For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अइसन होले नेता

आईल जब चुनाव त नेता जी दिहले दिखाई ।
हाथ जोड़ के सबसे कहले वोट हमरे के दिहजा भाई।। दिन मे हाथ जोड़ पाव पड़ सबसे वोट मंगीहे भाई। राती मे घरे घरे नोट , दारु के गंगा दिहे बहाई।।
करिहे वादा कि बिजली हैन्डपम्प घरे घरे देब लगवाई।
सड़क नाली स्कूल तलाब नहर सब कुछ देब बनवाई।।
आप सब मिल के हमके सांसद दिही बनाई।
सब कर मनरेगा मे काम देब लगवाई।।
अगर बन जाइब मंत्री त अफसर लोग के दिमाग देब ठिक कराई।
आप सब के अन्नपुर्णा योजना के कार्ड घरे घरे देब पहुचाई।।
दारु गुन्डागर्दी के बल पर नेता जी सांसद भइले भाई। आ नोट के बल पर मंत्रीओ बनगइले भाई।।
पहुचते दिल्ली कइल सब वादा गइले भुलाई।
आ गद्दी पर बइठके खुबे खातरन मलाई।।
आज कल के नेतन के इहे बा कहानी।
"जी" के दुख हम आप से केतना बताई।।

Views: 477

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rash Bihari Ravi on May 15, 2010 at 11:32am
jeta aisan jiw ha jawan tabe dikhai di jab okar jarurat hoi ,
Comment by Ratnesh Raman Pathak on April 18, 2010 at 3:29pm
bus bahut badhiya rachna ba,yeh me kawno sak naikhe,aaj ke kuchh netawo ka yah katchha chittha prstut kiya hai apne.thanks to share .
Comment by Admin on April 18, 2010 at 3:16pm
Bahut badhiya hai, Aaj kal Rajnetawoo key liyey aam logo key man mey aisaa hi vichaar hai, jo aapkey kavita mey saaf dikh raha hai,

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 18, 2010 at 1:30pm
Bahut badhiya kavita ba, aa aajkal key rajniti key sajiv chitran kail gail ba, bahut badhiya rachna,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"इश्क़ तो है मगर ये इतनी भी शा'इराना नहीं कि तुझ से कहें साफ़ गोई सुनोगे क्या तुम ये अहमकाना…"
56 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
21 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
21 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service