For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,

अब कहाँ किसी में रही सोचने कि फुरसत ,
देखी गई हैं अक्सर इन्सान की ये फितरत ,
जाने कहाँ चली गई इंसानों से इंसानियत ,
यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,

अबलाओ पे अत्याचार चोर बन गए पहरेदार ,
होने लगी है अक्सर अपनों में ही तकरार ,
देखो यारो बदली कैसी इंसानियत कि सूरत ,
अंधी हो गई अपनी इंसाफ कि ये मूरत ,
यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,

आप रहो अब होशियार जानने को तैयार ,
अजब लगेगा आपको लोगो का व्यवहार ,
क्या न करवाए सब कुछ पाने कि चाहत ,
रोती हैं इस जहाँ में अक्सर मासूमियत ,
यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,

Views: 466

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 29, 2010 at 7:45pm
अबलाओ पे अत्याचार चोर बन गए पहरेदार ,
होने लगी है अक्सर अपनों में ही तकरार ,
बहुत खूब गुरु जी , सही कहा आपने अब कहाँ किसी में रही सोचने कि फुरसत,अच्छी रचना |
Comment by Ratnesh Raman Pathak on September 29, 2010 at 7:10pm
गुरु जी हम फिर से कह रहल बनी की राउर कविता के मिठास कुछ अलगे होला.कोई कुछ भी कहे लेकिन रउरा कलम में जादू बा .राउर इ कविता जहा एक तरफ वर्तमान समाज के मूह पर जोरदार तमाचा दे रहल बा वही दूसरी तरफ एह मंच के सदस्यन के मन मोह रहल बा .राउर इ मन के भाव ,दुनिया के सच,समाज के अवगुण इत्यादि कविता के रूप में प्रस्तुत करे के तरीका बड़ा निराला बा भैया .धन्यवाद्
राउर छोट भाई----रत्नेश रमण पाठक
Comment by Rash Bihari Ravi on September 29, 2010 at 12:49pm
dhanyabad aap sab ko
Comment by Pooja Singh on September 29, 2010 at 11:48am
गुरु जी
,प्रणाम बहुत बढिया लिखा आपने की {अबलाओ पे अत्याचार चोर बन गए पहरेदार ,
होने लगी है अक्सर अपनों में ही तकरार ,
देखो यारो बदली कैसी इंसानियत कि सूरत ,
अंधी हो गई अपनी इंसाफ कि ये मूरत ,
यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,}हमारे आज के समाज की यही असलियत है | आपको बहुत बधाई बढिया रचना के लिए |
Comment by आशीष यादव on September 28, 2010 at 6:22am
Sach yahi h asaliyat. Bahut sundar git. Wah
Comment by Subodh kumar on September 27, 2010 at 6:52am
sunder..bahut khub.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
30 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service