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चीन से रहना हमें चौकन्ना बाबाजी

रामदेव से मिल गये  अन्ना बाबाजी

राहुल की माँ रह गई भन्ना बाबाजी

काला धन यदि सचमुच वापिस आया तो
भारत  फिर  से  बनेगा   धन्ना   बाबाजी

अब मैं  झटपट देश का पी. एम. बन जाऊं

मोदी   के  मन   जगी   तमन्ना  बाबाजी

ख़ून न चूसें, कह दो खादी वालों से
प्यासे हैं तो चूस लें  गन्ना बाबाजी

पाकिस्तान तो अपने घर का पप्पू है

चीन से रहना हमें चौकन्ना बाबाजी

हीरो  ये,   जो   तेल  न  बेचें  टी  वी  पर 
दिलीप कुमार औ राजेश खन्ना बाबाजी

थाली तो सोने की तुमने दिखलादी
खाते क्या हो  हीरा-पन्ना बाबाजी ?

राजपूताने का इतिहास समझ लोगे

पढ़ लो 'पन्ना' वाला पन्ना बाबाजी

जब से वोट दिया 'अलबेला' चम्पत है

किते गयां ओय मेरेया चन्ना बाबाजी 

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Comment

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Comment by Albela Khatri on June 13, 2012 at 1:37pm

सम्मान्य श्री राम कृष्ण  खुराना जी,
आपकी सराहना के शब्द सर आँखों पर
सादर

Comment by Albela Khatri on June 13, 2012 at 1:27pm

आदर्य श्री उमाशंकर मिश्र जी, नमस्कार.
आपके स्नेहिल शब्दों  ने उत्साहवर्धन किया ...ऊर्जा दी...मैं ये सारी ऊर्जा बाबाजी की बैटरी  चार्ज करने में लगाऊंगा ...हा हा हा
आपका हार्दिक हार्दिक धन्यवाद

Comment by Albela Khatri on June 13, 2012 at 1:24pm

आदरणीय अरुण कान्त शुक्ला जी,
टिपण्णी दर टिपण्णी आपका स्नेह पा कर अभिभूत हूँ......स्नेह  के लिए  आभारी हूँ ....
बहुत बहुत  धन्यवाद  .
सादर 

Comment by Albela Khatri on June 13, 2012 at 1:22pm

आदरणीय अरुण कान्त शुक्ला जी,
स्नेह  के लिए  आभारी हूँ ....
बहुत बहुत  धन्यवाद  .
सादर 

Comment by Albela Khatri on June 13, 2012 at 1:19pm

सम्मान्य  अरुण श्रीवास्तव जी,
आपकी टिपण्णी ने तो निहाल कर दिया ....
वाह वाह .....आभारी हूँ मन से............'मनसे' नहीं.....हा हा हा हा

Comment by Arun Sri on June 12, 2012 at 11:39am

पाकिस्तान तो अपने घर का पप्पू है
चीन से रहना हमें चौकन्ना बाबाजी .. हे हे हे ! समझ गए आपकी बात ! आपका पप्पू भी समझ जाता !

हीरो  ये,   जो   तेल  न  बेचें  टी  वी  पर 
दिलीप कुमार औ राजेश खन्ना बाबाजी ........ बहुत बढ़िया सर जी ! शाहरूख को सुना दीजिए !

थाली तो सोने की तुमने दिखलादी
खाते क्या हो  हीरा-पन्ना बाबाजी ?  ...... असरदार सवाल ! है कोई जो बता दे (और सर ऊँचा रखे )?

Comment by अरुण कान्त शुक्ला on June 11, 2012 at 8:47pm

हीरो  ये,   जो   तेल  न  बेचें  टी  वी  पर 
दिलीप कुमार औ राजेश खन्ना बाबाजी  , वाह , राहुल की अम्मां रह गई भन्ना बाबाजी , बहुत सुन्दर व्यंग .. बधाई .

Comment by UMASHANKER MISHRA on June 11, 2012 at 6:10pm

एक और ओए ओए..... ओए ओए .......

क्या बात है अलबेला जी बाबाजी से बम बरसवा रहे हो

किसी को नहीं छोड़ेंगे ये बाबाजी| सारे खद्दर धारियों

को जेब्रा धारी बना कर गन्ना तक चुसवा दिया प्रभु

सूरत में रहते हो ......हम यहाँ एक हज़ार किलो मीटर

दूर रहते हुवे मोदी से ....

माँ कहती है बेटा सो जा मोदी सुन लेगा

हर एक लाइन हास्य व्यंग से लदी हुई है

एक लाइन जिसमें हीरो तेल बेचता है उसमे

अभिताभ बच्चन का नाम जुडना था आजकल तेल वही बेचते हैं

बधाई बधाई बधाई.... जीते रहो अलबेला भाई

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 11, 2012 at 11:52am

ख़ून न चूसें, कह दो खादी वालों से
प्यासे हैं तो चूस लें  गन्ना बाबाजी

गन्ना से गुड है बनता  गुड से बनती चीनी 

चीन  पाकिस्तान एक से भैया जनता बड़ी कमीनी

एक तो अपने ही भाई  दूजे न क्या दोस्ती निभाई 

छुरा घोपते पीठ पीछे  गाते हिंदी चीनी  भाई भाई 

मैं प्रदीप  आप अलबेला  खूब लिखते भाई 

देता हूँ इस रचना पर लंबी चौड़ी बधाई 

Comment by Ram Krishna Khurana on June 10, 2012 at 10:28pm

पाकिस्तान तो अपने घर का पप्पू है 
चीन से रहना हमें चौकन्ना बाबाजी 

सुंदर  कविता 

राम कृष्ण खुराना 

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