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बहुत तेज़ है मेरी लुगाई बाबाजी

 

ओ बी ओ परिवार के समस्त स्वजनों को अलबेला खत्री का विनम्र प्रणाम .

एक शो  और एक शूटिंग के  चलते मैं  तीन दिन  सूरत से बाहर रहा . इसलिए यहाँ हाज़िरी नहीं दे पाया . परन्तु  अच्छा ये रहा कि  महा उत्सव  में एक कुंडलिया और एक  घनाक्षरी  मैंने  टी वी पर भी सुनाई तो लोगों ने  ख़ूब सराहा .  बाबाजी वाली एक ग़ज़ल भी  मैंने  "बहुत ख़ूब" प्रोग्राम में प्रस्तुत कर दी  अगले हफ्ते उसे आप दबंग चैनल पर देख सकेंगे. एक  तुकबन्दी  आज पुनः आपकी सेवा में रख रहा हूँ .

सादर




घर-घर से आवाज़ ये आई बाबाजी
मार  ही  देगी  ये महंगाई बाबाजी

जनता जब से जूत चलाना सीख गई
नेताओं   की  शामत   आई  बाबाजी

उसके आगे कोई बहाना ना चलता
बहुत तेज़ है  मेरी  लुगाई  बाबाजी

जाने क्यों मुम्बई में घर से भी ज़्यादा
ओ बी ओ की  याद थी  आई  बाबाजी

हमने सुना है सारी ख़ुदाई एक तरफ़
एक  तरफ़  जोरू  का  भाई  बाबाजी

35 लाख का टायलेट क्यों न हो इनका
सत्ता   में    हैं    ये    इंकाई    बाबाजी

एक बार तुम राजनीति में घुस जाओ
फिर कितनी भी  करो कमाई बाबाजी

बाहर से तो  हँसा  रहा  है 'अलबेला'
लेकिन  भीतर  भरी रुलाई  बाबाजी


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Comment

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Comment by Albela Khatri on June 15, 2012 at 12:10pm

धन्यवाद राजेश कुमारी जी.......
___आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 15, 2012 at 11:45am

majedar ghazal kataaksh bhi khoob hai.bahut badhaai aapko.

Comment by Albela Khatri on June 14, 2012 at 8:36pm

Comment by Nilansh on June 14, 2012 at 8:29pm

:) :) :)

Comment by Albela Khatri on June 14, 2012 at 8:21pm

सम्मान्य  नीलांश जी,
रचना की सराहना के लिए आपको  बहुत बहुत धन्यवाद...........और आपने जिस खूबसूरती  के साथ अपनी पंक्तियाँ कही हैं  उनके लिए मैं सिर्फ़ इतना कहूँगा  :


तुकें आपने ख़ूब मिलाई बाबाजी
नीरोगी को दवा पिलाई बाबाजी

डाक्टर साहेब के चैम्बर से जब निकली
मन्द मन्द सिस्टर मुस्काई बाबाजी

_____हा हा हा हा .............सादर

Comment by Nilansh on June 14, 2012 at 8:04pm

Albela ji aapke is rachna ke liye koti badhaai

aur iski goonj door talak  jaaye..aamin

aapke is rachna me hamne bhi kuch jod diya aadarniya albela ji

kaisi kaisi baat chupaai baba ji

mat dene par shaamat aayi baba ji

do mitar ki raseed ata usko kar di

nirogi ko dawa thamaai baba ji

punah bahut badhaai aapko

doctor bhi ho gaye hain ab saane

nirogi ko dawaa thamaai baba ji

Comment by Albela Khatri on June 14, 2012 at 12:25pm

वाह जी वाह  प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी,  आप तो कमाल पे कमाल किये जा रहे हो....अपने स्नेह से मालामाल  किये जा रहे हो....बाबाजी  आपके बहुत आभारी हैं.....हा हा हा हा

सादर

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 14, 2012 at 11:12am

बाबा जी को पेटेन्ट करा लो 

घर पीछे टेंट एक लगा लो 

महंगायी बन छा जायेंगे 

ओ.बी.ओ. सहित आ जायेंगे 

आपको फिर कमी न लगेगी 

कविताओं की कली  खिलेगी 

आपकी नक़ल करने लगा हूँ 

अकड के चलने  मैं लगा हूँ 

अलबेला जी हैं मेरे संग 

देख रह गए लोग दंग

कहते हैं परिचय करवा दो 

हम सब को भी मिलवा दो 

मैं बोला कवि बन जाओ 

बढ़िया कविता उन्हें सुनाओ 

मिलने कि आ जायेगी बेला 

सुन्दर सहज है अलबेला 

बधाई.

आपकी तर्ज पर बाबा जी मेने है लिखी 

न जाने क्यूँ न आप की द्रष्टि पडी 

सादर आदरणीय अलबेला जी 

Comment by Albela Khatri on June 14, 2012 at 10:54am

आपका  हार्दिक हार्दिक स्वागत है  अविनाश जी और  आपकी आशंसा  सर आँखों पर
सादर 

Comment by AVINASH S BAGDE on June 14, 2012 at 10:36am

जाने क्यों मुम्बई में घर से भी ज़्यादा 
ओ बी ओ की  याद थी  आई  बाबाजी .....manch hi aisa hai...albela.

बाहर से तो  हँसा  रहा  है 'अलबेला' 
लेकिन  भीतर  भरी रुलाई  बाबाजी ....ky albeli gazal sunai baba ji...ALBELA ne bazm sajai babaji.

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