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बीवी को मत आँख दिखाओ बाबाजी

झूमो, नाचो, मौज मनाओ बाबाजी
जीवन का आनन्द उठाओ बाबाजी

ये क्या, जब देखो तब रोते रहते हो ?
घड़ी दो घड़ी तो मुस्काओ बाबाजी

मुझ जैसे मसखरे का चेला बन जाओ
दिवस रैन दुनिया को हँसाओ बाबाजी

ये सब नेता रक्तपिपासु कीड़े हैं
इनसे मत कुछ आस लगाओ बाबाजी

जनता के दुःख को जो अपना दुःख समझे
अब ऐसी सरकार बनाओ  बाबाजी

एक मिनट में ऐसी-तैसी कर देगी
बीवी को मत आँख दिखाओ बाबाजी

ओ बी ओ की परिपाटी है 'अलबेला'
आपस में सब प्यार लुटाओ बाबाजी

-अलबेला खत्री 

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Comment by satish mapatpuri on July 14, 2012 at 2:44am

एक मिनट में ऐसी-तैसी कर देगी
बीवी को मत आँख दिखाओ बाबाजी 

बहुत खूब अलबेला जी ,

सवा लाख की बात हुज़ूर ने फरमाया . 

हमको भी चेला बना लो बाबा जी .   

Comment by Albela Khatri on July 14, 2012 at 12:18am

गज़ब कर दिया उमाशंकर जी........
गज़ब ही कर दिया
बोले तो आपने कमाल ही कर दिया
___इत्ता सुन्दर शब्द समुच्चय देख कर तो  तबीयत हरी हो गई

कहना मत किसी से ............मैं घर में भी मुस्कुरा लेता हूँ............हा हा हा

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 11:50pm

आदरणीय भ्रमर जी,
आपने तो
तबीयत हरी करदी
रस से भरी  कर दी
जर्रे को जरी कर दी
खोटी थी खरी कर दी

___________आपका  दिली शुक्रिया ........
___हार्दिक धन्यवाद !

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 13, 2012 at 11:36pm

बीबी को भी साथ मगर तुम रख लेना

सारीं मस्ती भूल जाओगे बाबाजी

लगता है घर से  बाहर रहते हो

घर में रह जरा मुस्कराओ बाबाजी

एक मिनट में ऐसी-तैसी कर देगी
निचे कर के रखो आँख तुम बाबा जी

ये सब नेता कहो कौन से कीड़े है

किलनी है या जुआ या पिस्सू बाबा जी

ओ बी ओ में सब तरफ है छाया 'अलबेला'
मुफ्त बंट रहा प्यार यहाँ पर ..  बाबाजी

 थोड़ी सी मसखराइ  सादर ....अलबेला जी  आपकी सभी लाईन मस्त मस्त है खास ये

मुझ जैसे मसखरे का चेला बन जाओ
दिवस रैन दुनिया को हँसाओ बाबाजी  इस लाईन को सलाम

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 13, 2012 at 11:32pm

ये क्या, जब देखो तब रोते रहते हो ? 
घड़ी दो घड़ी तो मुस्काओ बाबाजी 

मुझ जैसे मसखरे का चेला बन जाओ 
दिवस रैन दुनिया को हँसाओ बाबाजी 

प्रिय अलबेला भाई ...

कुछ तंत्र मन्त्र झोली में डाले हास्य सिखाओ बाबा जी 
कुछ दिन गुर सिखलाओ भाई आप गुड ही रहो सदा 
  हम गुड से शक्कर बन जाएँ बाबा जी ...ह हा
हँसाना बड़ा मुश्किल काम है ये तो कोई आप से ही सीखे 
भ्रमर ५ 

 

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 4:48pm

निर्मल, परिमल, कोई नाम नहीं देना
'अलबेला' पर किरपा लाओ  बाबाजी

सीमा जी का यहाँ हृदय से स्वागत है
योगराज जी को भी बुलाओ बाबाजी

पल भर में कुछ भी न होगा सीमा जी
फ़ोकट हमको न धमकाओ बाबाजी
____हा हा हा आइये आइये सीमा जी...शामिल हो जाइए ..मज़ा आएगा ...

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 4:27pm

सुधर गये हो आप जान कर ख़ुशी हुई
अब जम के अशआर चलाओ बाबाजी
आप तो मास्टरजी हैं,  बन्दा चेला है
कृपया डंडा नहीं दिखाओ बाबाजी ....हा हा हा

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 4:20pm

पल दो पल का जीवन अच्छा रेखा जी.........
खाओ तुम आनन्द का लच्छा रेखा जी.........
__आभार !

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 13, 2012 at 4:19pm

थोडा सा भावुक हो गया था जी ...लो जी सुधार दिया .....सुधार  दिया ....

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 4:13pm

आप काफ़िया गड़बड़ करते आये हैं
नियम क़ायदा काम में लाओ बाबाजी ....हा हा हा हा हा

कृपया ध्यान दे...

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