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पर्यावरण संरक्षण से सम्बंधित दोहे

वृक्षों को मत काटिए, वृक्ष धरा शृंगार.

हरियाली वसुधा रहे, बहे स्वच्छ जलधार..

 

नदियाँ सब बेहाल हैं, इन पर दे दें ध्यान.  

कचरा निस्तारित करें, बन जाएँ इंसान..

 

जैविक खेती है भली, धरती हो आबाद. 

गोबर को अपनाइए, बचे रसायन खाद..

 

अदरक गमलों में उगे, उगें टमाटर लाल.

छत पर खेती भी करें, जीवन हो खुशहाल..

 

इसे आज ही त्यागिये, कभी न होती नष्ट.

पोलिथिन या प्लास्टिक, धरती को दे कष्ट..

 

कीट नाशकों का ज़हर, वार करे यह गुप्त.

पशु पक्षी बेहाल हैं, आज हुए कुछ लुप्त..

 

दूध पिलाते जो हमें, वही बने आहार.

इनसे कैसी दुश्मनी, क्यों होता संहार..

--अम्बरीष श्रीवास्तव  

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 28, 2012 at 11:17am

आदरणीय अम्बरीश जी 

पर्यावरण संरक्षण को समर्पित इस खूबसूरत दोहावली के लिए हृदय से साधुवाद. सादर.
Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 12:14pm

स्वागत है अनुज अरुण शर्मा जी ! हार्दिक आभार मित्र ! सस्नेह

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 27, 2012 at 12:04pm

भ्राताश्री कितनी खूबसूरती से आपने वर्णन किया है. वाह मज़ा आ गया. बधाई

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 11:31am

प्रिय आशीष जी, इन दोहों के मर्म को समझने के लिए आपका स्वागत हारते हुए आपके प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित कर रहा हूँ ....सस्नेह

Comment by आशीष यादव on July 27, 2012 at 11:21am

आदरणीय अम्बरीश सर, दोहों के माध्यम से वृक्ष की महिमा का गुण-गान काफी सुखद अनुभूति प्रदान करता है। वृक्ष की कमी से उत्पन्न खतरों को भी उजागर किया आपने।
बधाई स्वीकार करें गुरुवर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 11:20am

आदरेया राजेश कुमारी जी ! इसमें क्षमा मांगने जैसी क्या बात है ? आपने इन दोहों को सराह कर एक तरह से पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता ही की है!  आपका हार्दिक आभार आदरेया राजेश कुमारी जी ! सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 27, 2012 at 11:05am

क्षमा चाहती हूँ पढने में देरी हो गई ....बहुत ही शिक्षाप्रद उत्कृष्ठ दोहे अति सुन्दर हार्दिक बधाई आपको अम्बरीश जी 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 8:47am

सुप्रभात आदरणीय अशोक कुमार जी, आपने इन सभी दोहों के मर्म को महसूस करते हुए जो इन्हें सराहा है इस निमित्त आपके प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित कर रहा हूँ .....सादर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 8:45am

जय श्री राधे आदरणीय 'भ्रमर' जी, यह सन्देश जब हमारे मर्मस्थल को स्पर्श करेंगें तो इसका परिणाम अवश्य ही परिलक्षित होगा ...दोहों को सराहने के लिए आपके प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित कर रहा हूँ ......सादर 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 27, 2012 at 8:43am

स्वागत है आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी, आपने इन दोहों के मर्म को समझते हुए इनकी सराहना की है .....इस हेतु आपके प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित कर रहा हूँ ...... 

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