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तीन ताज़ा कह-मुकरियां




बाघ सरीखा जब वह गरजे,
भीडू अक्खी मुम्बई लरजे
राजनीति की नई आवाज़
क्या सखि उद्धव ?
नहीं सखि राज  



जनता रोये वह मुस्काये
मंहगाई  की हँसी उड़ाये
ठोक रहा वह सबको छेणी
क्या सखि मन्नू ?
नहीं सखि वेणी



प्यासा प्यासा तरसा तरसा
सावन में भी तनिक न सरसा
ताक रहा है मेघ मुहूरत
क्या सखि साजन ?
नहिं सखि सूरत  

-अलबेला खत्री

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Comment

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Comment by Albela Khatri on August 24, 2012 at 11:37pm

सादर धन्यवाद  आपको रक्ताले  भाईजी..........
बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 24, 2012 at 11:35pm

आदरणीय अलबेला जी

               सादर नमस्कार, बहुत सुन्दर कह मुकरियाँ और साथ में गुजरात के लिए आपके समर्पण को भी नमन.

              

रात रातभर जगता तपता,

दूर तलक है उसको तकता,

कैसे करे उससे गुजारिश,

क्या सखि नानी?

नहि सखि बारिश!

Comment by Albela Khatri on August 24, 2012 at 10:43am

नमस्कार प्रदीप जी......
आपका आना सुखद लगा
__आशा है स्वास्थ्य अच्छा होगा ........

सादर

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 24, 2012 at 10:13am

प्यासा प्यासा तरसा तरसा
सावन में भी तनिक न सरसा
ताक रहा है मेघ मुहूरत
क्या सखि साजन ?
नहिं सखि सूरत  

सब जगह गरज रहे

सब जगह बरस रहे

मेघ ममता की moorat  

aap  कोई करो उपाय

प्यासा न रहे सूरत.

बधाई.

 

Comment by Albela Khatri on August 23, 2012 at 6:37pm


शुक्रिया भाई जी,,,,,,,,,,,
आपका आभार नवल जी

Comment by Albela Khatri on August 23, 2012 at 6:36pm

धन्यवाद आदरणीया

Comment by Rekha Joshi on August 23, 2012 at 11:41am

..बधाई.

Comment by Naval Kishor Soni on August 23, 2012 at 11:06am

क्या बात है........बधाई.......

Comment by Albela Khatri on August 23, 2012 at 8:54am

नमस्कार अम्बरीश जी
बहुत बहुत धन्यवाद भाईजी........
आपकी प्रशंसा  सदैव प्रफुल्लित करती है

__सादर

Comment by Er. Ambarish Srivastava on August 23, 2012 at 8:51am

झांके सबके दिल के अंदर

कह मुकरी जिसकी सब सुन्दर

मस्त मीडिया प्रमुदित चेला  

क्या सखि छैला? नहिं अलबेला !

वाह आदरणीय अलबेला जी ! वाह ! क्या लज्जतदार कहमुकरियाँ कही हैं .......एक से बढ़कर एक ......सादर बधाई मित्रवर ....

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