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दर्द में जो बात है वो बात राहत में कहाँ !

संघर्ष में आनंद है जो कामयाबी में कहाँ !
दर्द में जो बात है वो बात राहत में कहाँ !

मुद्दा कोई उलझा रहे चलती रहें बस अटकलें ,
जो मज़ा उलझन में है वो सुलझने में कहाँ !


ज़िंदगी की मुश्किलों से रोज़ टकराते रहें ,
ज़िंदगी के साथ है सब मौत आने पर कहाँ !

बरसो बाद दोस्त मिला दिल को मिली कितनी ख़ुशी !
ये गर्मजोशी ,शिकवे ,गिले रोज़ मिलने में कहाँ !

हमको सुकून की नहीं हमें कशमकश की चाह ,
जो बात गर्म खून में वो ठंडे में कहाँ !

शिखा कौशिक 

Views: 483

Comment

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Comment by shikha kaushik on September 30, 2012 at 10:37pm
विजय जी ,सुरेन्द्र जी ,शालिनी जी व् राजेश जी उत्साहित करने हेतु हार्दिक आभार

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 30, 2012 at 9:55am

जो मजा चुनौती पूर्ण जिन्दगी जीने में  है वो और कहाँ बढ़िया प्रस्तुति शिखा जी 

Comment by shalini kaushik on September 30, 2012 at 12:56am

बहुत सही व् शानदार प्रस्तुति आभार <a href="http://shalinikaushik2.blogspot.com">उत्तर प्रदेश सरकार राजनीति छोड़ जमीनी हकीकत से जुड़े.</a>

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 30, 2012 at 12:53am

ज़िंदगी की मुश्किलों से रोज़ टकराते रहें ,
ज़िंदगी के साथ है सब मौत आने पर कहाँ !

सच में शिखा जी संघर्ष और चलते रहने में ही मजा है  ..बहुत सुन्दर सन्देश  ...सुन्दर रचना  ....

अपना स्नेह बनाये रखें 
भ्रमर ५ 
जय श्री राधे 

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 29, 2012 at 7:30pm

मन को आनंद व्यस्त रहने में ही आता है... इन भावों को सुन्दर दो धुर पर तौलते हुए शाब्दिक चित्रण किया है आपने... बधाई इस अभिव्यक्ति पर शिखा कौशिक जी 

कृपया ध्यान दे...

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