For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

“रोहन! अब ये आदत कहाँ से सीख रहा है! रोमी आंटी को नमस्ते क्यों नही किया?” रमेश गुस्से में बोला!
“थॉरी पापा!” रुआंसा आवाज थी रोहन की!
“ह्वाट सॉरी...गलती फिर सॉरी..कोई सॉरी नही मिलेगी!”
“अरे बेटा! अब जाने भी दो! पाँच साल का भी तो नही है ये....” कमरे में बैठे बुज़ुर्ग बोले ही थे कि रमेश बीच में ही बोल पड़ा, “पिताजी, आपको पता है न, मुझे टोक पसंद नही, फिर भी? शांत रहिए!” बुज़ुर्ग चुप हो गए! रमेश बोलता रहा!
अगले दिन! स्कूल में!
“रोहन! बातें नही, इधर ध्यान दो!” टीचर बोली!
“मैम, आपतो पता है न, मुझे तोक पतंद नही, थांत रहिए!” रोहन एकदम सहजता से बोला!

-पियुष द्विवेदी ‘भारत’

Views: 484

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on October 4, 2012 at 11:16am

धन्यवाद नीलम जी...!

Comment by Neelam Upadhyaya on October 4, 2012 at 10:15am
अच्छी लघु कथा.  बधाई स्वीकार करें.
बच्चे वही सीखेंगे जो देखेंगे-सुनेंगे.
Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on October 3, 2012 at 8:46am

कुमार गौरव अजितेंदु जी......धन्यवाद एवं महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए बधाई!

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on October 3, 2012 at 8:08am

अच्छी कहानी लिखी है आपने भारत जी.......बधाई.......

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on October 1, 2012 at 10:14am

आदरणीय सौरभ जी... आपकी प्रतिक्रिया से और बेहतर करने को हौसला मिलता है ! सादर आभार !

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on October 1, 2012 at 10:13am

आदरणीय राजेश कुमारी जी....बधाई हेतु धन्यवाद !

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on October 1, 2012 at 10:12am

आदरणीय प्राची जी... सादर आभार !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 30, 2012 at 5:23pm

बहुत गहरी बात कह डाली आपने. वाह !  इस खूबसूरत और अर्थवान लघुकथा पर बधाई लें, पियुष जी.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 30, 2012 at 5:15pm

सही कहा है मोम को जिस सांचे में ढालोगे उसी में ढल जाएगा बहुत शिक्षाप्रद  कथा 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 30, 2012 at 5:10pm

सुन्दर लघु कथा..

बोये बीज बबूल के तो आम कहाँ से पाए..
संदेश्परेक सुन्दर लघु कथा हेतु हार्दिक बधाई पियूष द्विवेदी जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
46 seconds ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
6 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन।बहुत सुंदर समसामयिक गजल हुई है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

ग़ज़ल

   ग़ज़ल2122  2122  212 कितने काँटे कितने कंकर हो गयेहर  गली  जैसे  सुख़नवर हो गये रास्तों  पर …See More
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service