For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आंखें करे शिकायत किनसे

आंखें करे शिकायत किनसे

वही व्‍यथा क्‍यों ढोते हैं

बीज वपन तो करता मन है

वे नाहक क्‍यों रोते हैं

 

पलकों की बंदिश में हरदम

क्‍यों वे रोके जाते हैं

और तड़पते देह यज्ञ में

समिधा से झोंके जाते हैं

 

उनके नभ अंगार भरे क्‍यों

नीरव जल में ज्‍वार भरे क्‍यों

उनकी अनुपम तरूणाई में

इतने व्रण क्‍यों होते हैं

 

आंखें करे शिकायत किनसे

उन्‍हें प्राण क्‍यों पीते हैं

कोरे-कच्‍चे काजल ही क्‍यों

उनको सुलभ सुभीते हैं

 

बंजारे उनके सपनों के

होते सुरभित ठौर कहां

कतरन-उतरन मिल जाते हैं

मिलते हैं पर तौर कहां

 

उनको यह संसार मिला क्‍यों

अश्रु का आगार मिला क्‍यों

उनके फूलों की क्‍यारि में

इतने तृण क्‍यों होते हैं

 

आंखें करे शिकायत किनसे......

 

Views: 521

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by राजेश 'मृदु' on October 8, 2012 at 2:44pm

आदरणीय सौरभ जी, राजेश कुमारी जी, अम्‍बरीश जी,बागी जी, शैलेन्‍द्र जी एवं सीमा जी आप सबके स्‍नेह से पूर्ण शब्‍दों ने अभिभूत कर दिया । आप सबका मार्गदर्शन मिलना कम बड़ी बात नहीं । जो त्रुटियां बताई गई हैं वे वास्‍तव में हैं । दरअसल लिखते वक्‍त कभी-कभी शब्‍द खो जाते हैं और जब तब ज्ञानी गुणी जन उसकी ओर ईशारा नहीं करें ध्‍यान  ही नहीं जाता है । सीमा जी का विशेष आभार कि उन्‍होंनें इतने अच्‍छे सुझाव दिए । अत्‍यंत विनम्रता के साथ क्षमा प्रार्थी हूं । बस इसी तरह मार्गदर्शन करते रहें कसावट भी आती रहेगी । वैसे भी कहते हैं कि बिना गुरू ज्ञान नहीं होता, सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 6, 2012 at 2:32pm


भाई राजेश कुमार झाजी, आपकी प्रवहमान पंक्तियों का मैं सदा से शैदाई रहा हूँ. लेकिन कभी-कभी पंक्तियों में स्पष्टता आँकने के फेर में प्रश्नों से या प्रश्नों में उलझ जाता हूँ. निम्नलिखित बंद में वही या वे कौन हैं ?
आंखें करे शिकायत किनसे
वही व्‍यथा क्‍यों ढोते हैं
बीज वपन तो करता मन है
वे नाहक क्‍यों रोते हैं .. .
पलकों की बंदिश में हरदम
क्‍यों वे रोके जाते हैं
और तड़पते देह यज्ञ में
समिधा से झोंके जाते हैं
 
बावज़ूद इसके कि इस कविता में गेयता अंतर्निहित है, इसकी पंक्तियों में मात्राओं की छूट ली गयी है. यह निश्चित है.

शुभच्छाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 6, 2012 at 12:59pm

बहुत सुन्दर गीत लिखा बधाई हो राजेश कुमार जी सीमा जी के कहे अनुसार थोड़ा सा संशोधन गीत में चार चाँद लगा देगा 

और हाँ आपको आँखों के अनुसार चार मात्रा चाहिए किन्तु आँखें स्त्री लिंग से गीत में आगे गड़बड़ हो रही है अर्थात आँख के लिए पुर्लिंग  में लोचन ले सकते  हैं दोनों जरूरतें पूरी हो जायेगी चार मात्रा और पुर्लिंग 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 6, 2012 at 12:28pm

//पलकों की बंदिश में हरदम

क्‍यों वे रोके जाते हैं

और तड़पते देह यज्ञ में

समिधा से झोंके जाते हैं//

राजेश कुमार जी, सुन्दर  भावों से सुशोभित इस गीत की रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! आदरणीय बागी जी व आदरेया सीमाजी से मैं भी सहमत हूँ ....शिल्प के आधार पर इस गीत में अभी बहुत कसावट की आवश्यकता है !


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 6, 2012 at 12:18pm

आंखें किनसे करे शिकायत,

व्‍यथा वही क्‍यों ढोते हैं,

बीज वपन तो करता है मन,

नाहक क्‍यों वो रोते हैं |

सुन्दर भाव, रचना को और प्रवाहमय बनाते तो आनंद आ जाता, बधाई राजेश कुमार झा जी, इस अभिव्यक्ति पर |

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on October 5, 2012 at 11:51pm

//उनके नभ अंगार भरे क्‍यों

नीरव जल में ज्‍वार भरे क्‍यों

उनकी अनुपम तरूणाई में

इतने व्रण क्‍यों होते हैं//     बहुत ही सुंदर भावाभियक्ति जो कि पाठक अनवरत बांधे रखने का प्रयास रखती है

                                        सुन्दर गीत पर हार्दिक बधाई

Comment by seema agrawal on October 5, 2012 at 7:49pm

बहुत सुन्दर गीत .......

बीज वपन तो करता मन है

वे नाहक क्‍यों रोते हैं..................बहुत सुन्दर पंक्तियाँ पर राजेश  जी आँखे तो स्त्रीलिंग है  

और तड़पते देह यज्ञ में

समिधा से झोंके जाते हैं......यह दोनों पंक्तियाँ भी बहुत प्रभावशाली हैं पर एक बार bold अक्षरों को देखिएगा 

अश्रु  का आगार मिला क्‍यों .........अश्रू हो गया है यहाँ आप चाहें तो नयन नीर आगार मिला क्यों कर सकते हैं या उर्दू शब्द से कोई परेशानी न हो तो अश्कों का आगार कर लीजिये क्योंकि आपके यहाँ ४ मात्राएँ चाहिए अश्रु में तीन ही हैं 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
4 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service