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ये परेशानियाँ तो आनी-जानी है

ये परेशानियाँ तो आनी-जानी है

मधुमेह तो कभी दिल की बीमारी है

 

गम है तो खुशी की वजहें भी हैं

रोते गुज़रे तो क्या जिंदगानी है

 

दिल के ज़ख़्मों से यूँ न घबराओ

बीते वक़्त की ये हसीं निशानी है

 

वक़्त बे वक़्त कुछ नहीं होता

जो मिला सब खुदा की मेहरबानी है

 

हर काम कल पर न छोड़ा करो

बर्बादिये वक़्त भी एक बीमारी है

 

गम की वजहें समझ नहीं आती

यही तो हमारी तुम्हारी कहानी है 

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Comment

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Comment by नादिर ख़ान on October 7, 2012 at 11:25pm

आत्म हत्या करना या किसी की बर्बादी का सबब बनना इंसानी काम कहाँ है, ये तो शैतानी फितूर  है ।

ब्लॉग मे आने और कोमेंट्स देने के लिए शुक्रिया शलिनी जी ।

Comment by shalini kaushik on October 7, 2012 at 10:41pm

पर बहुत से काम कल पर छोड़ दें तो शायद सही रहे .जैसे किसी का आत्महत्या या कहीं और बर्बादी का काम.बहुत सुदर विचारणीय प्रस्तुति बधाई नादिर जी 

Comment by नादिर ख़ान on October 4, 2012 at 11:02pm

बहुत शुक्रिया एवं  आभार राजेश  कुमारी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 4, 2012 at 8:55pm

हर काम कल पर न छोड़ा करो

बर्बादिये वक़्त भी एक बीमारी है

 अच्छी प्रस्तुति ये पंक्तियाँ  बहुत पसंद आई 

कृपया ध्यान दे...

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