For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

[1]   जल चरणों के श्लोक यह ,  जग हित में शुभ-लाभ !

       पी कर विष   प्रदूषण  का ,   हुआ   नीर   अमिताभ !!

[2]   पाट कर   सब ताल कुँए   ,   हम ने   की यह भूल !

       पानी  -  पानी    हो    गई     ,    निज  चरणों की धूल !!

[3]   कर न  पायें  दीपक  ज्यों   ,    तेल   बिना    उजियार !

        उसी  भाँति  यह नीर है     ,    जीवन    का    आधार !!

[4]   पिघल-पिघल कर ग्लेशियर,   देते    नित    संकेत !

        जल प्रलय अब दूर नहीं  ,     सब जन जाएँ  चेत !!

[5]    सूरज आग   उगल    रहा   ,      बढ़ता   जाए   ताप  !

        जल बिना यह जीवन है   ,    जैसे इक  अभिशाप !!

[6]    पानी   का क्या   मोल   है   ,     जाने     रेगिस्तान !

        जहाँ   उसे   इक बूँद   भी     ,     लागे   सुधा  समान !!

[7]    कहीं   बाढ़    सूखा    कहीं    ,     कहीं   सुनामी  ज्वार !

        मूर्ख   मानव   खोल   रहा    ,      जल   प्रलय  के  द्वार !!

[8]    सागर   से   बादल    बनें     ,      बादल   से यह नीर !

        जल  बिना यह  जीवन है   ,      सचमुच    टेढ़ी   खीर !!

[9]    अत्यधिक   जल दोहन से ,     सूख रहे   सब स्रोत !

         कैसे जल बिन फिर चलें ,      इस  जीवन  के पोत !!

[10]   नीर  बिना   जीवन   नहीं    ,      बाँधो   मन में   गाँठ !

         जीवन  रूपी  पुस्तक   का    ,      जल ही पहला  पाठ   !!

[11]   धन - दौलत   से   कीमती   ,      पानी   की   हर   बूँद !

         पानी   को   बरबाद     कर    ,       यूँ  ना   आँखें    मूँद !!

[12]   जल  कहे   यह मानव से    ,     नष्ट  न  करियो  मोय !

         अपितु मैं जल समाधि बन ,    नष्ट    करूँगा    तोय !!

[13]   जो  मानव  जन नित करें ,    पानी  का   सम्मान !

         उस  के   जीवन   में    रहे     ,    सदा   मधुर  मुस्कान !!

[14]   पानी    से   मत     पूछिए    ,     क्या  है  उस  का रंग   !

         रंग  जाए   उस   रंग    में     ,      मिल  जाए  जिस  संग !!

[15]  जल  जीवन  का   सार   है   ,       परखो   जी    श्री मान !

         देते     हैं    सन्देश    यही    ,        गीता    और    क़ुरान !!

[16]   स्वार्थ   पूर्ति   ही न बनें    ,        जीवन का  अभिप्राय !

       "लतीफ़" हम सब मिल करें ,   जल  रक्षण के उपाय !!

                                          लतीफ़ खान ,,  दल्ली राजहरा ...

Views: 6548

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Feb 14
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Feb 14
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Feb 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service