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आज करना कुछ नया-सा चाहता हूँ

आज करना कुछ नया-सा चाहता हूँ

आस के जज़्बात भरना चाहता हूँ

 

ये ग़ज़ल मेरी अधूरी है अभी तक

बस तेरी ख़ुशबू मिलाना चाहता हूँ

 

शौक़ है ये और ज़िद भी है हमारी

दिल में दुश्मन के उतरना चाहता हूँ

 

ख़ौफ़जद है ज़िंदगी अब तो हमारी

प्यार के कुछ रंग भरना चाहता हूँ 

 

दुश्मनों ने दोस्त बन कर जो किया था

गलतियाँ उनकी भुलाना चाहता हूँ

(मात्रा  2122  2122  2122  की कोशिश की है ।)

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Comment

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Comment by नादिर ख़ान on November 22, 2012 at 10:10pm
बहुत आभार राजेश कुमारी जी, आप ने रचना को पसंद किया ।
कृपया रचनाओं मे त्रुटि का भी ज़िक्र करें ताकि और बेहतर करने की कोशिश की जाए ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 22, 2012 at 6:04pm

ये ग़ज़ल मेरी अधूरी है अभी तक

बस तेरी ख़ुशबू मिलाना चाहता हूँ

 

शौक़ है ये और ज़िद भी है हमारी

दिल में दुश्मन के उतरना चाहता हूँ

 वैसे तो पूरी ग़ज़ल ही शानदार है ये दोनों शेर बहुत पसंद आये 

Comment by नादिर ख़ान on November 22, 2012 at 3:38pm

बहुत शुक्रिया भाई मनोज कुमार जी 

Comment by नादिर ख़ान on November 22, 2012 at 3:37pm

आदरणीय वीनस जी आपकी advice सर आँखों पर 

बहुत शुक्रिया आपका ।

Comment by manoj kumar chouhan on November 22, 2012 at 3:11pm

शौक़ है ये और ज़िद भी है हमारी

दिल में दुश्मन के उतरना चाहता हूँ

Comment by वीनस केसरी on November 22, 2012 at 3:56am

वाह वा नादिर खान साहिब क्या कहने  इस शेअर ने तो देर तक अपने पास रोके रखा .......

ये ग़ज़ल मेरी अधूरी है अभी तक
बस तेरी ख़ुशबू मिलाना चाहता हूँ

 
खूबसूरत ग़ज़ल के लिए विशेष बधाई स्वीकार करें

// दोस्तों ने दुश्मनी में जो किया था
गलतियाँ उनकी भुलाना चाहता हूँ.. //

यह शेर बाकी के अशआर से थोडा हल्का लगा मिसरा -ए- उला  थोडा और मेहनत की मांग कर रहा है

कृपया ध्यान दे...

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