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चांदनी आज फिर विदा होगी.........

एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ ...... गुरुजनों से अनुरोध है कृपया मार्गदर्शन किजिए 

चांदनी आज फिर विदा होगी
रोशनी आज फिर फना होंगी

जब कभी रंग रोशनी होंगे
आपके हाथ में हिना होगी

दर्द दे आज फिर हमें मौला
दर्द की आज इन्तहा होगी

हो गया एक नज़्म का सौदा
शायरी देख कर खफा होगी

चूम लों आँख, सोख लों पानी
पास में आपके दुआ होगी

~अमितेष 

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Comment by राज लाली बटाला on December 22, 2012 at 12:17am

बहुत ही ख़ूबसूरत!! मुबारकबाद अमितेश जी.. 

हो गया एक नज़्म का सौदा
शायरी देख कर खफा होगी ~~ 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 21, 2012 at 3:24pm

हो गया एक नज़्म का सौदा
शायरी देख कर खफा होगी

आदरणीय अमी तेष जी, सादर 

सुन्दर. बधाई. 

Comment by Anwesha Anjushree on December 19, 2012 at 6:52pm

paas aapke dua hogi....sunder

Comment by अमि तेष on December 19, 2012 at 9:40am

विशेष पोस्ट में ग़ज़ल शामिल करने का शुक्रिया 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on December 17, 2012 at 6:50pm

हो गया एक नज़्म का सौदा
शायरी देख कर ख़फ़ा होगी

बहुत ही ख़ूबसूरत शे'र... वाह.. मुबारकबाद अमितेश जी..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 17, 2012 at 10:56am

बढ़िया शेर निकले हैं सुन्दर प्रयास बहुत बहुत बधाई 

Comment by अमि तेष on December 17, 2012 at 10:21am

जानकारी और मार्गदर्शन के लिये  शुक्रिया वीनस भाई ....... ये आपके बिना नहीं हो पाता .......... 

Comment by वीनस केसरी on December 17, 2012 at 3:04am

अमितेष जी,

May 28, 2011
के बाद आज December 16, 2012 को यहाँ आपके द्वारा ग़ज़ल पोस्ट देख कर कर सुखद अनुभूति हुई

निश्चित ही इस लंबे अंतराल में आपने ग़ज़ल के सन्दर्भ में गहरा ज्ञान अर्जित किया है | यह संयम ही आपके अंदर के शायर के लिए एक बेशकीमती दौलत है जो दूसरों के लिए एक उदाहरण बन कर सामने आया है

भाव आपके पास सदैव से है सबसे खुशी की बात यह है कि आपने बहरो-वज्न को साध लिया है अब कहन को साधने के क्रम में नियमित ग़ज़ल पोस्ट करते रहे
देखें धीरे धीरे सब कुछ समरस हो जायेगा

सादर शुभेच्क्षु

Comment by अमि तेष on December 17, 2012 at 12:21am

एक छोटे से इस्लाह के बाद ......

चांदनी आज फिर विदा होगी

रोशनी आज फिर फना होंगी

जब कभी रंग रोशनी होंगे
आपके हाथ में हिना होगी

दर्द दे आज फिर हमें मौला
दर्द की आज इन्तहा होगी

हो गया एक नज़्म का सौदा
शायरी देख कर खफा होगी

चूम लों आँख, सोख लों पानी
पास में आपके दुआ होगी

~अमितेष

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