For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ट्राई करॊ,,,,,,,,,,,,
============
शायद मिल ही जायॆ, लाइन ट्राई करॊ ॥
कभी कर दॆगी दिलपॆ, साइन ट्राई करॊ ॥१॥

मॊबाइल नंबर शायद, पहचानती हॊ वॊ,
पी.सी.ऒ. सॆ डालकॆ, क्वाइन ट्राई करॊ ॥२॥

हॆलॊ हाय बॊलॆ ग़र, बनॆगी बात वरना,
बर्थ-डॆ पार्टी मॆं हॊकॆ, ज्वाइन ट्राई करॊ ॥३॥

मॆहनत का फल भी, मिलॆगा यकीनन,
फ़्रॆन्डसिप,रॊज़ डॆ, वॆलॆन्टाइन ट्राई करॊ ॥४॥

ग़र प्यार मॆं हॊ गई, बद-हज़मी तुम्हॆं,
काला नमक और, अजवाइन ट्राई करॊ ॥५॥

प्यार कॆ चक्कर मॆं, हिलनॆं लगॆ मियाँ,
दवाखाना मॆं जाकर, सलाइन ट्राई करॊ ॥६॥

उसॆ भूल जानॆ मॆं ही, भलाई है दॊस्त,
नहीं भूलती अग़र तॊ, वाइन ट्राई करॊ ॥७॥

झटकॆ मॆं मरना या, घुट घुट कॆ मरना,
आइडिया जॊ भी लगॆ, फाइन ट्राई करॊ ॥८॥

फॆल हॊ जायॆं फ़ार्मूलॆ,जॊ सभी कॆ सभी,
फ़ार्मूला नम्बर नाइन्टी, नाइन ट्राई करॊ ॥९॥

ख्वाहिशॊं कॊ रिचार्ज, करतॆ रहॊ "राज"
सिग्नल न मिलॆ दूसरी,लाइन ट्राई करॊ ॥१०॥

कवि - "राज बुन्दॆली"

Views: 423

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on December 25, 2012 at 7:26pm

Ashok Kumar Raktale जी बहुत बहुत धन्यवाद,,,,,,,,,,,,,,,आभार आपका,,,,,,,,,,,,,

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 24, 2012 at 9:02pm

आदरणीय राज बुन्देली जी सादर, बहुत सुन्दर नुस्खे बधाई स्वीकारें.

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on December 18, 2012 at 3:08pm

SUMAN MISHRA जीबहुत बहुत धन्यवाद,,,,,,,,,,,,,,,आभार आपका,,,,,,,,,,,,,

Comment by SUMAN MISHRA on December 18, 2012 at 11:15am

क्या बात है..आपकी कविता का नया रुख...बहुत सुंदर,,,,राज जी,....यहाँ का रुख और आपके शब्द,,,,सोने में सुहागा

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन।बहुत सुंदर समसामयिक गजल हुई है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

ग़ज़ल

   ग़ज़ल2122  2122  212 कितने काँटे कितने कंकर हो गयेहर  गली  जैसे  सुख़नवर हो गये रास्तों  पर …See More
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . क्रोध

दोहा पंचक. . . . क्रोधमानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध…See More
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service