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जजिया कर फिर जिया, जियाये बजट हालिया-

 

मौलिक / अप्रकाशित

करकश करकच करकरा, कर करतब करग्राह ।
तरकश से पुरकश चले, डूब गया मल्लाह ।
डूब गया मल्लाह, मरे सल्तनत मुगलिया ।
जजिया कर फिर जिया, जियाये बजट हालिया ।
धर्म जातिगत भेद, याद आ जाते बरबस ।
जीता औरंगजेब, जनेऊ काटे करकश ।

करकश=कड़ा करकच=समुद्री नमक
करकरा=गड़ने वाला
कर = टैक्स
करग्राह = कर वसूलने वाला राजा

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Comment by ram shiromani pathak on March 1, 2013 at 2:14pm

डूब गया मल्लाह, मरे सल्तनत मुगलिया । 
जजिया कर फिर जिया, जियाये बजट हालिया । 
धर्म जातिगत भेद, याद आ जाते बरबस । 
जीता औरंगजेब, जनेऊ काटे करकश ।

आदरणीय रविकर जी" बहुत अच्छा लगा बधाई सुंदर रचना के लिए।

Comment by mrs manjari pandey on March 1, 2013 at 1:16pm
आदरणीय रविकर जी" जियाये बजट हालिया " पढ़ कर बहुत अच्छा लगा बधाई सुंदर रचना के लिए।

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