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अरे ओ नौजवानों ,
अब उठो और
खुद से ये पूछो |
दिया जिसने तुम्हे है सब कुछ
उसी के दिल -
-से आज तुम पूछो
कभी हमसे भी पूछो ,
और लोगों से भी पूछो |
किया तुमने है क्या
उस माँ की खातिर
जिसने तुम्हे ममता परोसी है |
आँचल से लिपटकर जिसके
दुनिया ये सोती है |
जिसका जीवन बना आदर्श
आज फिर , ममता वो रोई है |
जिसने सभी के चेहरों पर
मुस्कान है लायी ,
वो ममता आज फिर
खुद हंस-हंस के रोई है |
जिसने खुद जगकर
हमको सुलाया है ,
उसी माँ की इन आँखों से
आज फिर नींद गायब है |
किया हमने है क्यों ऐसा
कि "ममता" खुद ही रोई है |
जिन सपनो को उसने
तिल-तिल पिरोया है
उन्ही सपनो कि गहराई में आज
मेरी माँ फिर से खोयी है |
क्यों ये ममता आज फिर
ज़ोरों से रोई है !

--अक्षय ठाकुर "परब्रह्म"

Views: 649

Comment

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Comment by Akshay Thakur " परब्रह्म " on February 6, 2011 at 12:52am
Thanks Shradhha Ma'am :)
Comment by Akshay Thakur " परब्रह्म " on January 21, 2011 at 11:10pm
Dhanyavaad Sir :)
Comment by आशीष यादव on January 21, 2011 at 3:16pm

माता से बढ़ कर कौन है इस दुनिया में| सुन्दर भावों से प्रदर्शित किया आपने| माँ पर ही मेरी ये रचना देख लीजियेगा|

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:20628

 

Comment by Abhinav Arun on January 21, 2011 at 12:41pm

माँ ईश्वर की श्रेष्ठ कृति

और कविता में व्यक्त आपके श्रेष्ठ भाव

आपकी साहित्यिक गंभीरता और परिपक्वता को दर्शाते है

बधाई !!!

Comment by GOPAL BAGHEL 'MADHU' on January 21, 2011 at 9:00am
Bahuta sundara bha'va prava'ha hae A'pakii prathama kavita' mem'.
Dhiire dhiire chhanda va vya'karan'a mem' sudha'ra la'te chalem'. Likhate chalem' .. Gati pakr'em va phira gun'avatta' sudha'te va manjate chalem'. Kuchha kaviyom' se nikat'ata' bana'ye ralhem' ..Sama'lochana' kara'te rahem'..sahate rahem'..samajhatr rahem'..

Ka'vya jagata mem' susva'gata! Maim' kuchha du'ra Canada mem' hu'n para hrdaya se sable nikat'a hu'n.
Comment by Akshay Thakur " परब्रह्म " on November 18, 2010 at 6:25pm
गणेश जी भाई एवं नवीन भाई - बहुत बहुत धन्यवाद | :)

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 17, 2010 at 6:39pm
जिन सपनो को उसने
तिल-तिल पिरोया है
उन्ही सपनो कि गहराई में आज
मेरी माँ फिर से खोयी है |
क्यों ये ममता आज फिर
ज़ोरों से रोई है !

वाह वाह अक्षय जी,बहुत मार्मिक विषय को आपने उठाया है, जिस दिन माँ की ममता तड़प कर रो दी उस दिन हमारा जीवन व्यर्थ हो जायेगा |
बेहतरीन काव्य कृति पर बधाई स्वीकार कीजिये |

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